International Disability Day 3Dec — हर साल की तरह इस वर्ष भी 3 दिसंबर को विश्वभर में अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस(International Disability Day) मनाया जा रहा है, जिसे पहली बार 1992 में United Nations (संयुक्त राष्ट्र) महासभा के प्रस्ताव 47/3 के तहत स्थापित किया गया था।
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Toggle2025 की थीम — समावेशिता और सामाजिक प्रगति
इस वर्ष की थीम है — “Fostering disability-inclusive societies for advancing social progress”।
इस थीम के माध्यम से दुनिया को यह संदेश दिया जा रहा है कि दिव्यांगता किसी कमजोरी नहीं, बल्कि विविधता का हिस्सा है — और समाज, नीतियाँ व संरचनाएँ ऐसी होनी चाहिए जिनमें दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर, सम्मान व सहयोग मिले।
उद्देश्य — समान अधिकार, समावेश और सम्मान
दिव्यांग दिवस का उद्देश्य सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक ऐसी दुनिया की कल्पना करना है जिसमें विकलांगता किसी बाधा न बने। इसके अंतर्गत आते हैं:
- दिव्यांग व्यक्तियों के मानवाधिकारों, गरिमा और सामाजिक सम्मान की रक्षा।
- शिक्षा, रोजगार, सामाजिक भागीदारी, सार्वजनिक सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करना।
- भेदभाव, अव्यवस्था और सुविधाओं की कमी के चलते जीवन में आने वाली चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
भारत में दिव्यांग दिवस — समावेशिता की दिशा में बढ़ते कदम
भारत में दिव्यांग दिवस पर सरकार, गैर-सरकारी संगठन और समाज — तीनों स्तरों पर कई तरह की पहल होती हैं। इनमें शामिल हैं—
- स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, शिक्षा-सुविधा एवं रोजगार की पहल।
- दिव्यांग छात्रों और श्रमिकों के लिए आरक्षण, सहायक उपकरण (assistive devices) और विशेष सुविधाएँ सुनिश्चित करने की कोशिश।
- समाज में समावेशिता की सोच को बढ़ावा — दिव्यांग व्यक्ति केवल मदद पाने वाले नहीं, बल्कि समाज के समकक्ष योगदानकर्ता हों।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी पहलें सिर्फ एक दिन या सिमित इवेंट्स तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — बल्कि दीर्घकालिक सोच के साथ संरचनात्मक बदलाव चाहिए।
दिमाग़ खोलने वाली बातें
दुनियाभर में लगभग 1.3 अरब से अधिक लोग (लगभग हर 6 में 1 व्यक्ति) किसी न किसी प्रकार की विकलांगता का सामना करते हैं।
विकलांगता सिर्फ शारीरिक नहीं — कभी-कभी मानसिक, नेत्रहीनता, श्रवण-अशक्तता आदि रूपों में होती है; इसलिए समझ, संवेदनशीलता व उचित पहुंच सबका अधिकार है।
inclusion (समावेशिता) या accessibility (पहुँच) सिर्फ सुविधा नहीं — मानवाधिकार और समानता की बुनियाद है।
आगे क्या करना चाहिए?
- सड़क, स्कूल, अस्पताल, सार्वजनिक परिवहन — सब जगह accessibility सुनिश्चित करें।
- शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य व सोशल सुविधाओं में दिव्यांगों को बराबरी दें।
- समाज में बढ़ाएँ — समझ, सम्मान व जागरूकता; दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, विविधता समझें।
- नीतिगत बदलाव — सरकारी एवं निजी स्तर पर inclusive policies अपनाएँ; assistive technologies व सहूलियतें बढ़ाएँ।
'अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस'
— Ameet Satam (@AmeetSatam) December 3, 2025
समानता, सहयोग और सम्मान — यह है हमारा लक्ष्य।
अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर मिलकर उसे पूर्ण करने का संकल्प लें।#अंतरराष्ट्रीय_दिव्यांग_दिवस #WorldDisabilityDay pic.twitter.com/wovhmgrvqP
समावेशन की दिशा में दुनिया का कदम
विश्व विकलांगता दिवस केवल जागरूकता का दिन नहीं, बल्कि एक वैश्विक आंदोलन है जो समाज को यह याद दिलाता है कि समान अवसर किसी कृपा का नहीं, बल्कि अधिकार का विषय है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर की सरकारों, संस्थाओं और संगठनों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल एक्सेसिबिलिटी में बड़े सुधार किए हैं, ताकि दिव्यांग व्यक्तियों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। आधुनिक तकनीक — जैसे AI, स्क्रीन-रीडर्स, स्मार्ट प्रॉस्थेटिक्स और सेंसरी डिवाइस — ने लाखों दिव्यांग लोगों के जीवन को अधिक स्वतंत्र, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम न केवल नीतियों में बदलाव लाएँ, बल्कि अपनी सोच में भी समावेशिता को अपनाएँ।
निष्कर्ष
3 दिसंबर 2025 का दिव्यांग दिवस हमें याद दिलाता है कि असली विकास सिर्फ अर्थव्यवस्था या तकनीक में नहीं, बल्कि समावेश और समानता में है। जब हम सभी — सक्षम हों या differently-abled — बराबरी और सम्मान के साथ साथ चलेंगे, तभी हमारा समाज वास्तव में मजबूत, संवेदनशील और प्रगतिशील बनेगा।
इस दिव्यांग दिवस पर, आइए हम सिर्फ शुभकामनाएँ न दें — बल्कि वास्तविक बदलाव की दिशा में कदम उठाएँ।
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