संसद के शीतकालीन सत्र में पारित हुआ VB-G RAM G बिल इन दिनों देश की राजनीति का केंद्र बन गया है। इस बिल के जरिए सरकार ने करीब 20 साल पुराने MGNREGA (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) कानून को हटाकर ग्रामीण रोजगार के लिए एक नया ढांचा पेश किया है। जहां सरकार इसे “विकसित भारत” की दिशा में बड़ा सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ग्रामीण भारत और गरीबों के खिलाफ कदम मान रहा है।
लोकसभा और राज्यसभा—दोनों सदनों में इस बिल के दौरान भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने सदन में विरोध प्रदर्शन किया और सरकार पर बिना पर्याप्त चर्चा के कानून थोपने का आरोप लगाया।
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ToggleVB-G RAM G बिल क्या है?
VB-G RAM G यानी Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission-Gramin बिल को ग्रामीण रोजगार और आजीविका को नया स्वरूप देने के लिए लाया गया है। सरकार का दावा है कि इस कानून से गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, इस बिल के लागू होते ही MGNREGA समाप्त हो जाएगा, जिसने वर्षों तक ग्रामीण मजदूरों को 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी दी थी। MGNREGA की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यह “अधिकार आधारित कानून” था, जिसमें काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी था।
राहुल गांधी का तीखा हमला
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने VB-G RAM G बिल को लेकर सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने इस कानून को “गांव विरोधी” और “राज्य विरोधी” बताया। राहुल गांधी का कहना है कि सरकार ने गरीबों से उनका कानूनी अधिकार छीन लिया है।
उनका आरोप है कि MGNREGA ने ग्रामीण मजदूरों को सम्मान, सुरक्षा और मोलभाव की ताकत दी थी, जबकि नया बिल रोजगार को सरकारी नियंत्रण में ले आता है। राहुल गांधी ने कहा कि इससे सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और छोटे किसानों को होगा, जो संकट के समय MGNREGA पर निर्भर रहते थे।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान MGNREGA ने लाखों परिवारों को भुखमरी और पलायन से बचाया था।
विपक्ष की आपत्तियां
विपक्ष का कहना है कि यह बिल बिना विस्तृत बहस और संसदीय समिति की समीक्षा के जल्दबाजी में पास किया गया। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने राज्यों से सलाह नहीं ली, जबकि ग्रामीण रोजगार का सीधा असर राज्यों पर पड़ता है।
इसके अलावा, विपक्ष को आशंका है कि नए कानून में रोजगार की गारंटी कमजोर हो जाएगी और बजट की सीमा तय होने से जरूरतमंदों को काम नहीं मिलेगा। उनका कहना है कि MGNREGA सिर्फ रोजगार योजना नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का आधार था।
सरकार का जवाब
सरकार का कहना है कि MGNREGA में कई व्यावहारिक समस्याएं थीं—जैसे भ्रष्टाचार, फर्जी जॉब कार्ड और काम की गुणवत्ता। VB-G RAM G बिल इन खामियों को दूर करेगा और रोजगार को विकास से जोड़ेगा।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, नया कानून जल संरक्षण, सड़क निर्माण, ग्रामीण आवास और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर केंद्रित है। सरकार का दावा है कि इससे गांवों में स्थायी रोजगार और आर्थिक मजबूती आएगी।
आगे की तस्वीर
VB-G RAM G बिल के पारित होने के बाद साफ है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक विवाद बनेगा। विपक्ष ने देशभर में आंदोलन की चेतावनी दी है, जबकि सरकार अपने फैसले को सही ठहराने में जुटी है।
यह बहस सिर्फ एक कानून की नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाती है कि क्या ग्रामीण रोजगार एक अधिकार रहेगा या केवल सरकारी योजना बनकर सीमित हो जाएगा। इसका असर आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत की दिशा तय करेगा।
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