राजस्थान के बाड़मेर (Barmer) जिले में इन दिनों प्रशासनिक और छात्र समुदाय के बीच एक बड़े विवाद ने सुर्खियाँ बटोरी हैं। कलेक्टर टीना डाबी (Tina Dabi) का नाम सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीति दोनों में खूब चर्चा में है। छात्रों के विरोध प्रदर्शन से लेकर बम धमकी वाली ईमेल (bomb threat email)तक के पूरे प्रकरण ने मीडिया और जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
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Toggleछात्रों का विरोध और ‘Reel Star’ विवाद
बाड़मेर में उठा यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब महाराणा भूपाल कॉलेज ,गर्ल्स कॉलेज (Maharana Bhupal College (MBC) Girls College) के सामने कुछ छात्राओं ने परीक्षा शुल्क में बढ़ोतरी के खिलाफ धरना दिया। छात्राओं का कहना था कि वे अपनी परेशानी सीधे जिला कलेक्टर तक पहुँचाना चाहती थीं और उनसे मिलकर बात करना चाहती थीं। इसी दौरान माहौल उस वक्त बिगड़ गया, जब एक प्रशासनिक अधिकारी ने कलेक्टर टीना डाबी को छात्रों के लिए “रोल मॉडल”(Reel model) बताया। इस पर नाराज़ कुछ छात्रों ने उन्हें “रील स्टार”( Reel star) कहकर टिप्पणी कर दी और आरोप लगाया कि वह मीडिया और सोशल मीडिया गतिविधियों में ज़्यादा व्यस्त रहती हैं, जबकि छात्रों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता।
Bomb Threat Hoax: बाड़मेर कलेक्टर कार्यालय में बम धमकी
इसी दौरान बाड़मेर कलेक्टर कार्यालय को एक बम धमकी वाला ई-मेल भी प्राप्त हुआ, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन सतर्क हो गया। ई-मेल में दावा किया गया था कि कलेक्टर कार्यालय परिसर में RDX जैसे विस्फोटक लगाए गए हैं और किसी भी समय धमाका हो सकता है। सूचना मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ता और K9 डॉग स्क्वॉड तुरंत मौके पर पहुंचे और पूरे परिसर में सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया।
करीब दो घंटे तक चली जांच के बाद पुलिस ने स्पष्ट किया कि परिसर में कोई भी विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। जांच में यह धमकी पूरी तरह फर्जी (होअक्स बम थ्रेट) साबित हुई। कलेक्टर टीना डाबी ने कहा कि किसी तरह की वास्तविक खतरे की स्थिति नहीं थी, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया गया और प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए परिसर को सुरक्षित रखा।
गौरतलब है कि इस तरह की फर्जी ई-मेल धमकियाँ पहले भी राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में सामने आ चुकी हैं। अक्सर ऐसी ई-मेल VPN या मास्क्ड सर्वर के जरिए भेजी जाती हैं, जिनकी जांच की जाती है ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
राजनीतिक और जनमत प्रतिक्रियाएँ
इस पूरे विवाद ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। कुछ नेताओं और विश्लेषकों ने छात्रों के बयान को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए प्रशासन और अधिकारियों की आलोचना की है। उनका कहना है कि युवाओं की आवाज़ को दबाया नहीं जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर कलेक्टर टीना डाबी के समर्थकों और प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि छात्रों का यह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं था और प्रशासन ने पूरे मामले को संयम और शांति के साथ संभाला।
यह मामला केवल एक घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे युवा पीढ़ी और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच विश्वास, जवाबदेही और संवाद जैसे अहम मुद्दों पर भी बहस शुरू हो गई है। छात्रों का कहना है कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना गया, जबकि प्रशासन का दावा है कि सोशल मीडिया ने इस विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।
निष्कर्ष (Conclusion)
बाड़मेर में सामने आया यह विवाद दो अहम पहलुओं की ओर ध्यान दिलाता है। पहला, छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद की अहमियत और उससे जुड़े लोकतांत्रिक मूल्यों पर उठते सवाल। दूसरा, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में सामने आने वाली फर्जी धमकियाँ और उन्हें गंभीरता से लेने की प्रशासनिक ज़िम्मेदारी। किसी भी तरह की बातचीत, असहमति या विरोध शांतिपूर्ण और जिम्मेदार तरीके से होना चाहिए। वहीं अफवाहों और गलत सूचनाओं का फैलाव न केवल स्थिति को बिगाड़ता है, बल्कि लोकतंत्र और समाज—दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
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