swaraj Kaushalपूर्व राज्यपाल

नई दिल्ली, 4 दिसंबर 2025 — पूर्व मिजोरम राज्यपाल और वरिष्ठ वकील Swaraj Kaushal का आज दोपहर निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे। परिवार की ओर से बताया गया है कि अचानक सीने में दर्द की शिकायत होने पर उन्हें दिल्ली के AIIMS अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

उनकी बेटी, सांसद Bansuri Swaraj, ने सोशल मीडिया पोस्ट में भावुक अंदाज़ में कहा कि उनके पिता अब उसी माँ के पास चले गए हैं — जिन्हें 2019 में उनके हाथों अंतिम विदाई दी गई थी। “उनका आत्म-विचार, तन्मयता, सादगी और देशभक्ति हमें हमेशा प्रेरित करेगी,” उन्होंने लिखा।

Swaraj Kaushal
सुषमा स्वराज के पति और पूर्व मिजोरम राज्यपाल स्वराज कौशल का 73 वर्ष की उम्र में निधन। देशभर में शोक, PM मोदी से लेकर राजनीतिक हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि।"
कौन थे Swaraj Kaushal — एक संक्षिप्त परिचय

जन्म: 12 जुलाई 1952, सोलन (अब हिमाचल प्रदेश में)

पेशा: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील — 34 वर्ष की उम्र में उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा “सीनियर एडवोकेट” नामित किया गया था।

राजनीतिक प्रोफ़ाइल:

1990–1993: सबसे कम उम्र के मिजोरम राज्यपाल — महज 37 वर्ष की उम्र में।

1998–2004: हरियाणा से राज्यसभा सांसद।

Sushma Swaraj से विवाह 1975 में — भारत की एक प्रमुख राजनीतिज्ञ थीं। उनके साथ स्वराज कौशल की जोड़ी सार्वजनिक जीवन में एक आदर्श जोड़ी मानी जाती थी।

"सुषमा स्वराज के पति और पूर्व मिजोरम राज्यपाल स्वराज कौशल का 73 वर्ष की उम्र में निधन। देशभर में शोक, PM मोदी से लेकर राजनीतिक हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि।"
"सुषमा स्वराज के पति और पूर्व मिजोरम राज्यपाल स्वराज कौशल का 73 वर्ष की उम्र में निधन। देशभर में शोक, PM मोदी से लेकर राजनीतिक हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि।"
वकील से राज्यपाल तक: उनका करियर

स्वराज कौशल को आपातकाल (1975–77) के दौरान वकील के रूप में पहचान मिली, जब उन्होंने विरुद्ध परिस्थितियों में विपक्षी नेताओं की पैरवी की। इसके बाद उन्होंने मिजोरम में राज्यपाल के रूप में उत्तर-पूर्व भारत में शांति कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनके अनुसार, संविधान, न्याय और सामाजिक न्याय को साधने का मार्ग हमेशा वकालत और लोकतंत्र रहा, और उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी इसी उद्देश्य के लिए समर्पित की।

अंतिम संस्कार और शोक

स्वराज कौशल का अंतिम संस्कार आज शाम दिल्ली के Lodhi Road Crematorium (लोधी रोड कब्रिस्तान) में हुआ। उनके शव के अंतिम संस्कार में केंद्रीय मंत्री, दिल्ली बीजेपी के वरिष्ठ नेता, RSS के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

स्वराज कौशल का सार्वजनिक जीवन में प्रभाव

कानून, राजनीति और जनसेवा — तीनों क्षेत्रों में उनकी पहचान एक संतुलित, संवेदनशील और बुद्धिमान नेता की रही। लंबे समय तक उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के रूप में राजनीतिक कैदियों, ट्रेड यूनियन नेताओं और जनआंदोलन से जुड़े व्यक्तियों के मामलों में निशुल्क कानूनी मदद दी। मिजोरम शांति समझौते से जुड़े महत्वपूर्ण संवादों में उनका योगदान आज भी उत्तर-पूर्व मामलों के विशेषज्ञों द्वारा सराहा जाता है। उनकी उपलब्धियों ने उन्हें ऐसी शख्सियत बना दिया था, जिनकी राय और कार्यशैली को देश के विधि-जगत और प्रशासनिक तंत्र में गंभीरता से सुना जाता था।

शोक संदेश और श्रद्धांजलि

Narendra Modi (प्रधान मंत्री) ने ट्वीट कर कहा कि स्वराज कौशल ने वकालत के माध्यम से असंख्य कमजोरों की आवाज़ उठाई और अपनी जिंदगी समाज सेवा में बिताई।

उनकी बेटी, Bansuri, नेताओं और आम लोगों — सभी ने कहा कि स्वराज कौशल का व्यक्तित्व, उनके सिद्धांत और उनकी सेवाएं हमेशा स्मरणीय रहेंगी।

निष्कर्ष

स्वराज कौशल का जाना सिर्फ एक वरिष्ठ वकील, एक राजनेता या पूर्व राज्यपाल के जाने का नहीं — बल्कि उस युग के अंत का प्रतीक है, जब राजनीति, कानून और संवेदनशीलता के बीच तालमेल रखा जाता था।
वो एक ऐसे वकील थे जिन्होंने समाज के हाशिए पर रहने वालों का संघर्ष सुना, उनके हक की लड़ाई लड़ी; और एक ऐसे शासक थे जिन्होंने उत्तर-पूर्व भारत की अशांतता में शांति स्थापित करने का प्रयास किया।
उनकी विरासत — न्याय, सादगी और सेवा — आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बनेगी।

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By Divyay

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