“Malayalam Cinema ने खोया अपना सशक्त स्वर — Sreenivasan का निधन”मलयालम सिनेमा के वरिष्ठ कलाकार Sreenivasan का 69 वर्ष की उम्र में निधन, फिल्म जगत ने एक युगदृष्टा रचनाकार को खो दिया।

कोच्चि | 20 दिसंबर 2025: मलयालम फिल्म जगत के सबसे प्रभावशाली और बहुआयामी कलाकारों में से एक Sreenivasan का शनिवार को निधन हो गया। अभिनेता, पटकथा लेखक, निर्देशक और निर्माता के रूप में दशकों तक सिनेमा को दिशा देने वाले Sreenivasan के निधन से केरल ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। वे 69 वर्ष के थे।

उनके निधन की पुष्टि के बाद मलयालम फिल्म इंडस्ट्री, राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत की कई हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया। Sreenivasan को एक ऐसे कलाकार के रूप में याद किया जा रहा है, जिन्होंने सिनेमा को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज से संवाद का माध्यम बनाया।

एक कलाकार, जिसने सिनेमा को आईना बनाया

Sreenivasan का योगदान केवल अभिनय तक सीमित नहीं था। वे उन दुर्लभ कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने acting, screenwriting और direction—तीनों क्षेत्रों में समान दक्षता दिखाई। उनकी फिल्मों में आम आदमी की ज़िंदगी, सामाजिक पाखंड, नैतिक द्वंद्व और मानवीय संवेदनाएँ बेहद सहज लेकिन तीखे अंदाज़ में सामने आती थीं।

उन्होंने हास्य, व्यंग्य और गंभीर सामाजिक विषयों को इस तरह पिरोया कि दर्शक हँसते-हँसते सोचने पर मजबूर हो जाते थे। यही वजह है कि उनकी लिखी या निभाई गई भूमिकाएँ आज भी प्रासंगिक मानी जाती हैं।

Sreenivasan
मलयालम सिनेमा के वरिष्ठ कलाकार Sreenivasan का 69 वर्ष की उम्र में निधन, फिल्म जगत ने एक युगदृष्टा रचनाकार को खो दिया।
करियर की शुरुआत से शिखर तक का सफ़र

Sreenivasan ने अपने करियर की शुरुआत 1970 के दशक के अंत में की थी। शुरुआती वर्षों में उन्होंने सहायक भूमिकाएँ निभाईं, लेकिन जल्द ही उनकी संवाद अदायगी और लेखन क्षमता ने उन्हें अलग पहचान दिला दी।
आने वाले दशकों में उन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और कई चर्चित फिल्मों की पटकथाएँ लिखीं, जिन्हें मलयालम सिनेमा के क्लासिक कार्यों में गिना जाता है।

उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे सामाजिक मुद्दों को उपदेशात्मक बनाए बिना, कहानी के स्वाभाविक प्रवाह में प्रस्तुत करते थे।

सामाजिक चेतना और साहसिक लेखन

Sreenivasan उन कलाकारों में थे, जो सिनेमा के ज़रिये समाज से सवाल पूछने का साहस रखते थे। जाति, धर्म, राजनीति, नैतिकता और पारिवारिक ढांचे जैसे विषयों पर उन्होंने बेबाकी से लिखा और अभिनय किया।
कई बार उनके काम ने विवाद भी खड़े किए, लेकिन उन्होंने कभी अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया।

उनकी फिल्मों को इसलिए भी याद किया जाता है क्योंकि वे आम आदमी की भाषा और भावनाओं में बात करती थीं।

“Malayalam Cinema ने खोया अपना सशक्त स्वर — Sreenivasan का निधन”
“Malayalam Cinema ने खोया अपना सशक्त स्वर — Sreenivasan का निधन”
परिवार और विरासत

Sreenivasan की विरासत उनके परिवार के ज़रिये भी आगे बढ़ रही है। उनके बेटे Vineeth Sreenivasan और Dhyan Sreenivasan मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और अपने-अपने तरीके से सिनेमा में योगदान दे रहे हैं।
पिता के रूप में Sreenivasan को एक मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत माना जाता रहा है।

फिल्म जगत की प्रतिक्रिया

उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्मी हस्तियों, लेखकों और दर्शकों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उन्हें “मलयालम सिनेमा की अंतरात्मा” कहा, तो कई ने उनके संवाद और किरदारों को याद किया, जो आज भी लोगों के जीवन से जुड़े हुए लगते हैं।

निष्कर्ष: एक युग, जो यादों में जीवित रहेगा

Sreenivasan का निधन मलयालम सिनेमा के लिए केवल एक कलाकार का खो जाना नहीं है, बल्कि एक सोच, एक दृष्टि और एक साहसी आवाज़ का जाना है।
उनकी फिल्में, पटकथाएँ और किरदार आने वाली पीढ़ियों के लिए संदर्भ बनकर रहेंगे।

वे भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी कहानियाँ, उनके शब्द और उनका सिनेमा उन्हें हमेशा ज़िंदा रखेगा।

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By Divyay

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