देशभर में उठे प्राइवेसी के सवालों और लगातार बढ़ते विरोध के बाद केंद्र सरकार ने वह विवादित आदेश वापस ले लिया है, जिसमें सभी स्मार्टफोन कंपनियों को अपने नए और पुराने फोन में Sanchar Saathi App जबरन इंस्टॉल करने का निर्देश दिया गया था। दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा 27–28 नवंबर को जारी इस आदेश ने अचानक भारी हंगामा खड़ा कर दिया था। सोशल मीडिया पर जनता ने इसे Privacy Risk, Forced App Installation और संभावित Surveillance Threat बताते हुए कड़ा विरोध किया। अब सरकार ने साफ कहा है कि यह ऐप अनिवार्य नहीं, बल्कि पूरी तरह वैकल्पिक रहेगा।
Table of Contents
Toggleक्या था विवादित आदेश?
आदेश के अनुसार, भारत में बेचे जाने वाले हर स्मार्टफोन में Sanchar Saathi को प्री-इंस्टॉल करना था और इसे फोन से हटाया नहीं जा सकता था।
यह भी कहा गया था कि जिन उपयोगकर्ताओं के पास पहले से फोन मौजूद हैं, उन्हें Software Update के जरिए यह ऐप अनिवार्य रूप से दिया जाएगा।
साधारण भाषा में—हर भारतीय के फोन में यह ऐप जबरदस्ती डालने का प्लान था।
इस ऐप द्वारा दिए जाने वाले मुख्य फीचर्स थे:
- IMEI Tracking
- Device Verification
- Lost Phone Blocking
- SIM Count Checking
लेकिन जैसे ही आदेश सामने आया, डिजिटल अधिकार समूहों, टेक विशेषज्ञों और आम उपभोक्ताओं में चिंता फैल गई।
विरोध क्यों हुआ?
विरोध के मुख्य कारण ये थे:
- Experts ने इसे User Privacy Violation बताया
- लोग बोले कि यह एक
- Forced Government App है
- कई संगठनों ने इसे Digital Surveillance Fear से जोड़ा सोशल मीडिया पर #PrivacyRights और #DigitalFreedom ट्रेंड करने लगे
- फोन कंपनियों के लिए यह नीति तकनीकी रूप से असंभव थी
कई नेताओं ने इसे पेगासस विवाद से जोड़ते हुए कहा कि कोई भी ऐप जिसे हटाया न जा सके, प्राइवेसी पर सीधा हमला है।
टेक विशेषज्ञों ने चेताया कि इस ऐप को मिलने वाली संभावित Permissions — SMS Access, Device ID , और अन्य संवेदनशील डेटा — गंभीर चिंताएँ पैदा कर सकती हैं।
सरकार ने क्या कहा? आदेश क्यों वापस हुआ?
बढ़ती आलोचनाओं के बीच सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि:
- स्मार्टफोन कंपनियों को Sanchar Saathi को प्री-इंस्टॉल करने की कोई अनिवार्यता नहीं है
- यह सिर्फ “सुझाव” था, अनिवार्य नहीं
Mandatory App Installation का दावा “गलतफहमी” है - ऐप को केवल User Consent के आधार पर इंस्टॉल किया जा सकता है
- टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद में कहा:
“सरकार का उद्देश्य उपभोक्ता सुरक्षा था, लेकिन गलतफहमी फैल गई। ऐप अनिवार्य नहीं होगा, यह पूरी तरह वैकल्पिक रहेगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि ऐप में किसी तरह की निगरानी या स्नूपिंग नहीं होती।
Sanchar Saathi क्या करता है?
जनवरी 2025 में लॉन्च हुआ यह ऐप मोबाइल सुरक्षा के लिए बनाया गया था। इसके माध्यम से:
- चोरी हुए फोन का IMEI Block किया जा सकता है
- खोए हुए फोन को Trace Device से खोजा जा सकता है
- किसी नंबर पर कौन-कौन से सिम सक्रिय हैं, यह पता चलता है
- फर्जी या धोखाधड़ी वाले मोबाइल कनेक्शन की पहचान होती है
ऐप का उद्देश्य अच्छा है, लेकिन विवाद तब हुआ जब इसे अनिवार्य बताया गया।
विशेषज्ञों की राय
टेक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐप उपयोगी है, लेकिन किसी भी ऐप को जबरन इंस्टॉल करना Digital Rights और Privacy Standards के खिलाफ है।
उनका कहना है:
- ऐप की Permissions बहुत व्यापक हैं
- अनिवार्य इंस्टॉलेशन उपभोक्ताओं में बड़ा संदेह पैदा करता
- ऐसा आदेश भविष्य में गलत मिसाल बन सकता है
सरकार का आदेश वापस लेना इसलिए एक “संतुलित फैसला” माना जा रहा है।
अब आगे क्या?
Tech Policy विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद भारत में:
- Data Protection Laws
- Cybersecurity Standards
- App Permission Guidelines
पर पुनर्विचार की ज़रूरत को उजागर करता है।
डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार ने जनता की आवाज सुनी, और यह सकारात्मक संकेत है कि भविष्य की नीतियाँ User Consent को प्राथमिकता देकर बनाई जाएँगी।
Sanchar Saathi ऐप को अनिवार्य करने का आदेश वापस लेकर सरकार ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय उपभोक्ता अब अपनी प्राइवेसी को लेकर जागरूक हैं और मजबूरन किए गए किसी भी डिजिटल आदेश को स्वीकार नहीं करेंगे।
अब ऐप का उपयोग पूरी तरह से उपभोक्ता की मर्जी पर होगा—यानी Technology में Consent और Transparency पहले से ज़्यादा महत्वपूर्ण हो चुके हैं।
visti GPS NEWS HUB