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देश के बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB)ने एक बड़े लोन फ्रॉड का खुलासा किया है। बैंक के अनुसार, Srei Group के पूर्व प्रमोटरों द्वारा लिए गए ऋण में ₹2,434 करोड़ की धोखाधड़ी पाई गई है। इस जानकारी के सार्वजनिक होते ही शेयर बाज़ार में PNB (Punjab National Bank) के शेयरों में लगभग 3% तक की गिरावट देखी गई।

PNB ने बताया कि आंतरिक जाँच के दौरान Srei Group से जुड़े खातों में गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। इसके बाद बैंक ने इस पूरे मामले को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को रिपोर्ट कर दिया है। बैंक का कहना है कि यह धोखाधड़ी पुराने ऋण खातों से जुड़ी है और अब इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और वसूली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

मुख्य बिंदु:

  • कुल धोखाधड़ी राशि: ₹2,434 करोड़
  • आरोपी: Srei Group के पूर्व प्रमोटर
  • मामला रिपोर्ट किया गया: RBI को
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शेयर बाज़ार पर असर

इस खबर के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

  • PNB के शेयरों में दिन के कारोबार में तेज़ गिरावट दर्ज की गई
  • सरकारी बैंकों के शेयरों में अस्थिरता देखी गई
  • विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे घोटाले बैंक की एसेट क्वालिटी और निवेशकों के भरोसे को नुकसान पहुँचाते हैं।

Srei Group का पृष्ठभूमि

Srei Group कभी इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग के क्षेत्र में एक बड़ा नाम था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कंपनी को भारी कर्ज, नकदी संकट और पुनर्गठन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इससे पहले भी समूह के वित्तीय लेन-देन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

नियामक और बैंकिंग सेक्टर की चिंता

इस बड़े लोन घोटाले के सामने आने के बाद पूरे बैंकिंग सेक्टर में जोखिम प्रबंधन (Risk Management) और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली (Internal Control System) की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर की धोखाधड़ी यह दर्शाती है कि क्रेडिट अप्रूवल, निगरानी और पोस्ट-डिस्बर्समेंट मॉनिटरिंग में कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए उस पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि RBI बैंक से विस्तृत रिपोर्ट मांग सकता है और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नए दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए जा सकते हैं। इसके अलावा, अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भी अपने बड़े कॉरपोरेट लोन खातों की दोबारा समीक्षा करने के संकेत मिल सकते हैं।

बैंकिंग विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के फ्रॉड न केवल संबंधित बैंक की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करते हैं, बल्कि पूरे बैंकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता और निवेशकों के भरोसे को भी कमजोर करते हैं। खासतौर पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर पहले से ही बढ़ते एनपीए (NPA) और रिकवरी चुनौतियों का दबाव है, ऐसे में इस तरह के मामले सेक्टर के लिए चिंता का विषय बन जाते हैं।

वहीं, सरकार और नियामक संस्थानों पर भी यह दबाव बढ़ता जा रहा है कि वे बैंकिंग सुधारों, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही तंत्र को और मजबूत करें, ताकि भविष्य में बड़े लोन फ्रॉड को समय रहते रोका जा सके।

निष्कर्ष

PNB द्वारा सामने लाया गया ₹2,434 करोड़ का यह लोन घोटाला केवल एक बैंक से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह पूरी भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी तंत्र की एक बड़ी परीक्षा बनकर सामने आया है। इस प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बड़े कॉरपोरेट लोन मामलों में समय पर निगरानी और सख़्त आंतरिक नियंत्रण कितने ज़रूरी हैं।

आने वाले समय में यह देखना बेहद अहम होगा कि पंजाब नेशनल बैंक इस भारी-भरकम राशि की वसूली के लिए कितनी तेज़ और प्रभावी कार्रवाई करता है, साथ ही दोषी प्रमोटरों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को किस स्तर तक पहुँचाया जाता है। निवेशकों, जमाकर्ताओं और आम जनता की निगाहें अब बैंक, नियामकों और प्रवर्तन एजेंसियों पर टिकी हैं।

यह मामला सरकार और रिज़र्व बैंक के लिए भी एक चेतावनी है कि बैंकिंग सुधारों, जोखिम प्रबंधन प्रणालियों और टेक्नोलॉजी-आधारित निगरानी को और मज़बूत किया जाए। यदि इस प्रकरण से ठोस सबक लेकर कड़े कदम उठाए जाते हैं, तो यह घोटाला भविष्य में एक अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बैंकिंग सिस्टम की नींव रखने में सहायक साबित हो सकता है।

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By Divyay

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