putinभारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण क्षण — दोनों देशों के नेता हाथ मिलाते हुए, रणनीतिक साझेदारी और राजनयिक संबंधों को दर्शाता दृश्य।

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin के जन्मदिन पर भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उन्हें फोन कर गर्मजोशी से शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना की। इस मौके पर दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच जारी मजबूत दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

मोदी ने कहा कि वे दिसंबर में प्रस्तावित भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में पुतिन का भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। वहीं पुतिन ने भी प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए भारत के साथ अपने पुराने और भरोसेमंद रिश्ते की सराहना की।

दोस्ती और कूटनीति का संदेश


प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर भी एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा –

“Spoke with my friend President Putin and conveyed warm birthday greetings and best wishes for his good health and long life. Deeply appreciate his personal commitment to deepening India-Russia ties over the years.”

यह पोस्ट कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। “Modi wishes Putin” और “India-Russia Friendship” जैसे हैशटैग लाखों बार इस्तेमाल किए गए।

भारत-रूस रिश्तों की मजबूती की नई मिसाल


भारत और रूस के बीच रिश्ते दशकों पुराने हैं। रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, विज्ञान, और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लंबे समय से जारी है।

2000 में दोनों देशों के बीच Strategic Partnership Declaration पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसने रिश्तों को एक नई दिशा दी। इसके बाद हर साल दोनों देश बारी-बारी से Annual Summit आयोजित करते हैं।

इस साल दिसंबर में रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत यात्रा पर आ सकते हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते होने की उम्मीद है — खासकर रक्षा, तकनीक, व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में।

क्यों खास है मोदी-पुतिन की यह बातचीत?

यह फोन कॉल सिर्फ एक बधाई संदेश नहीं था, बल्कि इसके पीछे भारत की कूटनीतिक नीति की झलक भी छिपी है।
जब दुनिया में कई देश रूस के खिलाफ रुख अपना रहे हैं, ऐसे समय में भारत ने अपने पुराने दोस्त को बधाई देकर यह संदेश दिया है कि दोस्ती राजनीतिक दबावों से ऊपर है।

भारत ने हमेशा रूस को एक भरोसेमंद साझेदार माना है। चाहे रक्षा क्षेत्र हो या ऊर्जा, रूस ने भारत की ज़रूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है।

दिसंबर शिखर सम्मेलन से बढ़ीं उम्मीदें

दिसंबर 2025 में होने वाला भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उम्मीद की जा रही है कि इस मीटिंग में कई नए समझौते होंगे —

  •  रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन पर चर्चा
  •  परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में नए निवेश
  •  व्यापारिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने के निर्णय
  •  एशिया में स्थिरता और शांति को लेकर साझा बयान

यह बातचीत इसी आगामी मुलाकात की तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है।

वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका

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भारत आज विश्व राजनीति में एक संतुलन साधने वाले देश  के रूप में उभर रहा है। एक ओर भारत अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ व्यापारिक और तकनीकी साझेदारी बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर रूस और चीन जैसे देशों से भी मजबूत संबंध बनाए हुए है।

Modi wishes Putin जैसी खबरें बताती हैं कि भारत अपनी “स्वतंत्र विदेश नीति” पर कायम है। भारत न तो किसी गुट में शामिल है, न किसी देश के प्रभाव में।

मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई।
कुछ लोगों ने कहा कि यह “पुरानी दोस्ती की झलक” है, तो कुछ ने इसे “भारत की कूटनीतिक परिपक्वता” बताया।
रूस के लोगों ने भी पुतिन के जन्मदिन पर मोदी के संदेश को सराहा और ट्विटर पर “#ThanksIndia” और “#ModiPutinFriendship” जैसे ट्रेंड देखने को मिले।

भारत-रूस के संबंधों की झलक

  •  1955 में रूस (तब सोवियत संघ) के प्रधानमंत्री निकोलाई बुलगानिन और नेता निकिता ख्रुश्चेव भारत आए थे।
  •  रूस ने भारत को औद्योगिक विकास और रक्षा निर्माण में बड़ी सहायता दी।
  • 1971 में भारत-सोवियत मैत्री संधि ने दोनों देशों को रणनीतिक साझेदार बनाया।
  • आज भी रूस भारत के सबसे बड़े रक्षा सहयोगियों में से एक है।

दोस्ती का मानवीय पहलू

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच व्यक्तिगत रिश्ते भी काफी घनिष्ठ माने जाते हैं।
दोनों नेता कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में एक-दूसरे से कई बार मिल चुके हैं। मोदी ने कई मौकों पर पुतिन को “भरोसेमंद दोस्त” कहा है, वहीं पुतिन ने भी मोदी को “दूरदर्शी नेता” बताया है।

दोनों की इस व्यक्तिगत समझ ने भारत-रूस के रिश्तों को और मजबूत बनाया है।

चुनौतियाँ और संभावनाएँ

चुनौतियाँ

  • रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दबाव।
  •  पश्चिमी देशों की ओर से भारत पर रूस से दूरी बनाने का दबाव।
  • आर्थिक प्रतिबंधों का असर रूस के साथ व्यापार पर पड़ सकता है।

संभावनाएँ

  •  भारत और रूस मिलकर स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ा सकते हैं।
  •  ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट शुरू हो सकते हैं।
  •  “Make in India” और “Atmanirbhar Bharat” में रूस की भूमिका बढ़ सकती है।

आगे की राह

दिसंबर में जब पुतिन भारत आएंगे, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश किन-किन मुद्दों पर समझौते करते हैं।
संभव है कि भारत और रूस मिलकर नए क्षेत्रों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस रिसर्च, और ग्रीन एनर्जी में सहयोग की घोषणा करें।

इससे यह साफ है कि Modi wishes Putin सिर्फ एक औपचारिक संदेश नहीं था — बल्कि आने वाले महीनों में होने वाली बड़ी कूटनीतिक गतिविधियों की शुरुआत है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्रपति पुतिन को जन्मदिन की बधाई देना, भारत की विदेश नीति में “दोस्ती और रणनीति” के बीच संतुलन का उदाहरण है।
भारत ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वह हर देश के साथ अपने रिश्तों को “आपसी सम्मान” और “राष्ट्रीय हित” के आधार पर आगे बढ़ाता है।

यह कॉल केवल एक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भारत-रूस के बीच दशकों से चली आ रही दोस्ती का प्रतीक है ,और यही दोस्ती आने वाले वर्षों में दोनों देशों को और करीब लाएगी।

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By Divyay

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