8 दिसंबर 2025 को Parliament की Winter Session में जो बहस शुरू हुई — वह सिर्फ एक गीत पर नहीं, बल्कि भारत के identity, history, respect और समाज-राजनीति के जटिल सवालों पर केंद्रित थी। देश की राजधानी में, Lok Sabha और Rajya Sabha दोनों में उठ चुका है — क्या Vande Mataram को भारत का राष्ट्रीय गान बनाया जाए?
इस बहस ने Parliament में polarization, भावनात्मक जुड़ाव और इतिहास-भ्रम, तीनों को एक साथ ला दिया है।
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Toggleक्यों उठाई गई यह डिबेट — 150 साल पूरा, लेकिन विवाद जारी
2025 में Vande Mataram के अस्थायी गान बनने के बाद करीब 150 साल पूरे हुए। सरकार ने कहा कि इस गतिविधि को मान्य करना चाहिए।
लेकिन, इस गीत को लेकर सदियों से विशेष चिंताएँ रही हैं — कुछ समूहों ने इसे केवल राष्ट्रीय गान के लिए उपयुक्त नहीं माना, क्योंकि उन्होंने इसे सांप्रदायिक भावना का प्रतीक कहा।
इसलिए Parliament में, सरकार और विपक्ष दोनों पक्षों ने इसे उठाया — यह तय हुआ कि इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श ज़रूरी है, न कि जल्दबाज़ी में फैसला।
Parliament Debate: PM का वक्तव्य, विपक्ष का रुख, और नागरिक सवाल
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने Lok Sabha में कहा कि Vande Mataram “इतिहास और बलिदान की गाथा” है — और देश को उसकी जड़ों से जोड़ने का प्रतीक। उन्होंने इस परिपेक्ष्य में यह कहा कि अगर majority सहमत हो तो गान के रूप में अपनाना चाहिए।
दूसरी ओर, विपक्ष — खासतौर पर तेलंगाना, बंगाल और कुछ उत्तर-पूर्वी राज्यों से जुड़े सांसद — ने यह मांग की कि सभी धार्मिक, भाषाई व सामाजिक समूहों की भावना पर विचार करें। उन्होंने कहा कि बिना consensus के निर्णय समाज को बाँट सकता है। लेकिन संसद ने इस बहस को अगले सत्र तक टालने का निर्णय लिया — ताकि व्यापक public consultation, states की राय और सामाजिक विपक्ष को सुना जा सके।
क्यों है यह बहस केवल गीत देने या लेने की नहीं — बल्कि identity, inclusion और संविधान-व्यवस्था की
यह मामला GIF नहीं बल्कि deeper सवालों को उठाता है:
Identity & Diversity: भारत सिर्फ majority का देश नहीं, बल्कि multilingual, multi-religious, multi-cultural समाज है। क्या किसी एक गीत को national symbol बनाने से सभी महसूस करेंगे कि उनकी identity सम्मानित हो रही है?
Historical context: Vande Mataram उस समय लिखा गया था जब देश colonial युग का सामना कर रहा था। क्या उस context के गीत को 2025 के गान में बदलना — आधुनिक भारत, बदलते demographics और secular setup के लिए उचित है?
Constitution & Inclusivity: भारतीय संविधान धर्म, भाषा, जाति या धर्मनिरपेक्षता की बराबरी करता है। जब national anthem रूप में चुनाव हो — तो क्या वह गीत constitutional values के अनुकूल रहेगा?
नागरिक प्रतिक्रिया — सोशल मीडिया, civil society और युवाओं की राय
बहस संसद तक सीमित नहीं रही। सोशल मीडिया पर, युवा, intellectuals, artists, academicians — सबने अपने विचार रखे:
- कुछ बोले कि Vande Mataram patriotic भावना जगाता है, इतिहास से जोड़ता है।
- कई युवाओं ने कहा कि यदि गान बने, तो उन्हें inclusion, secularism, और respect का ध्यान रखा जाना चाहिए।
- Civil-society groups, minority organizations ने public consultation की मांग की।
निष्कर्ष — Vande Mataram Debate: एक Opportunity, लेकिन सोच-समझकर
इस बहस ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत सिर्फ शाब्दिक एकता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक विविधता का संगम है।
यदि Vande Mataram को national song बनाना है — तो यह सिर्फ एक निर्णायक moment नहीं, बल्कि एक Responsibility है।
ज़रूरी है कि हर राज्य, समुदाय, धर्म, भाषा और संस्कृति का प्रतिनिधित्व सुना जाए।
national identity की बात करते समय inclusion, respect और संवेदनशीलता प्राथमिक होनी चाहिए।
rushed decision से बेहतर है — thoughtful, inclusive और constitutional प्रक्रिया।
आखिरकार — एक गीत से ज़्यादा महत्वपूर्ण है — एक ऐसा भारत जहाँ सभी अपनी पहचान के साथ सुरक्षित, सम्मानित और समान महसूस करें।
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