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Yangon / Naypyitaw(Myanmar), 28 दिसंबर 2025: Myanmar में आज पहला आम चुनाव शुरू हो गया है — पांच साल के लंबे समय के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं, जब से फरवरी 2021 में सेना ने निर्वाचित सरकार को सत्ता से हटाया था। यह चुनाव सैन्य शासन के नियंत्रण में हो रहा है, जबकि देश गृहयुद्ध और राजनीतिक अशांति से जूझ रहा है।

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तीन चरणों में हो रहा मतदान

चुनाव को सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से तीन चरणों में आयोजित किया जा रहा है।
पहले चरण में सीमित क्षेत्रों में मतदान शुरू हुआ है, जबकि शेष क्षेत्रों में जनवरी 2026 के दौरान वोट डाले जाएंगे। कई संघर्षग्रस्त इलाकों में चुनाव कराना संभव नहीं हो सका है, जिससे बड़ी संख्या में नागरिक मतदान से बाहर रह गए हैं।

2021 के तख्तापलट के बाद पहला चुनाव

यह चुनाव उस सैन्य तख्तापलट के बाद हो रहा है जिसमें निर्वाचित सरकार को हटाकर सेना ने सत्ता संभाल ली थी। उस समय आंग सान सू की की पार्टी को भंग कर दिया गया था और प्रमुख विपक्षी नेताओं को हिरासत या सख्त प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा।
आज की स्थिति में प्रमुख विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया से बाहर हैं, जिससे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई है।

सैन्य समर्थित दलों का दबदबा

चुनाव में भाग लेने वाले अधिकतर दल या तो छोटे क्षेत्रीय संगठन हैं या ऐसे समूह हैं जिन्हें सैन्य शासन के करीब माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में सत्ता परिवर्तन की संभावना बेहद कम है और परिणाम पहले से तय ढांचे के अनुरूप ही आने की उम्मीद है।

म्यांमार में 2025 का चुनाव: सैन्य शासन के साये में लोकतंत्र की परीक्षा”
गृहयुद्ध और सुरक्षा की चुनौती

Myanmar इस समय भीषण गृहयुद्ध की स्थिति में है। कई हिस्सों में सशस्त्र विद्रोही समूह सक्रिय हैं, जिससे लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। इसी कारण सुरक्षा बलों की कड़ी तैनाती के बीच मतदान कराया जा रहा है।
कई नागरिकों ने डर और असुरक्षा के कारण मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

कम उत्साह, सीमित भागीदारी

मतदान केंद्र खुले तो हुए, लेकिन कई इलाकों में मतदाताओं की संख्या अपेक्षा से कम रही। राजनीतिक स्वतंत्रता की कमी और वास्तविक विकल्पों के अभाव ने लोगों के उत्साह को कमजोर किया है। आम नागरिकों के बीच यह भावना भी देखी जा रही है कि चुनाव उनके जीवन में वास्तविक बदलाव लाने में सक्षम नहीं होगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल

वैश्विक स्तर पर इस चुनाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों और कई देशों का मानना है कि जब तक सभी राजनीतिक दलों को बराबरी से भाग लेने का अवसर नहीं मिलता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक इस प्रक्रिया को पूरी तरह लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता।

इसके अलावा, आम नागरिकों के बीच यह चिंता भी गहराती जा रही है कि चुनाव के बाद शांति प्रक्रिया और राष्ट्रीय सुलह की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे या नहीं। कई लोगों को उम्मीद है कि नया राजनीतिक ढांचा कम से कम हिंसा में कमी, मानवीय सहायता की बेहतर पहुँच और संवाद की शुरुआत का रास्ता खोलेगा। हालांकि ज़मीनी हालात को देखते हुए यह सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या यह चुनाव देश को स्थिरता की ओर ले जाएगा या असंतोष और संघर्ष की मौजूदा स्थिति को और लंबा खींच देगा।

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निष्कर्ष

Myanmar का यह चुनाव ऐतिहासिक तो है, लेकिन अत्यधिक विवादास्पद भी। एक ओर इसे लोकतंत्र की ओर लौटने की शुरुआत बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सैन्य शासन की पकड़ को मजबूत करने का प्रयास भी माना जा रहा है।
आने वाले महीनों में चुनाव परिणाम और उसके बाद बनने वाली सत्ता संरचना यह तय करेगी कि यह प्रक्रिया वास्तव में लोकतंत्र की वापसी है या केवल औपचारिक चुनावी कवायद।

By Divyay

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