दुनियाभर में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जारी चिंता के बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी नई Fact Sheet में खुलासा किया है कि 10 से 19 वर्ष के हर सात में एक किशोर मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है। यह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर गंभीर चुनौती है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक विकास पर भी गहरा प्रभाव डाल रही है।

WHO के अनुसार, किशोरावस्था जीवन का वह दौर है जब भावनात्मक, शारीरिक और सामाजिक परिवर्तन सबसे अधिक होते हैं। यदि इन परिवर्तनों को उचित समझ, समर्थन और सहायता नहीं मिलती, तो यह मानसिक विकारों में बदल सकते हैं, जो आगे चलकर जीवनभर बने रह सकते हैं।

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अत्यधिक पढ़ाई का बोझ, समय की कमी और भावनात्मक तनाव — किशोर तनाव और चिंता के मुख्य कारण।

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश किशोर निम्न मानसिक विकारों से प्रभावित पाए गए:

1. भावनात्मक विकार (Emotional Disorders)

चिंता (Anxiety) और अवसाद (Depression) सबसे अधिक पाए जाने वाले विकार हैं।

पुराने या बड़े किशोर (15–19 वर्ष) इस समूह में अधिक प्रभावित पाए गए।

इनके लक्षणों में — उदासी, डर, आत्मविश्वास की कमी, नींद की समस्या, अकेलापन और रोज़मर्रा की गतिविधियों में रुचि कम होना शामिल है।

2. व्यवहार संबंधी विकार (Behavioral Disorders)

ADHD (Attention Deficit Hyperactivity Disorder) और Conduct Disorder अधिकतर 10–14 वर्ष के किशोरों में देखे गए।

इन विकारों से पढ़ाई, परिवारिक रिश्तों और सामाजिक जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है।

3. खान-पान से जुड़े विकार (Eating Disorders)

एनोरेक्सिया (Anorexia) और बुलीमिया (Bulimia) जैसे विकार अक्सर किशोरावस्था के दौरान शुरू होते हैं।

इनका सीधा असर शारीरिक स्वास्थ्य, शरीर की छवि और आत्मसम्मान पर पड़ता है।

4. सिज़ोफ्रेनिया और गंभीर मनोवैज्ञानिक विकार

आमतौर पर देर किशोरावस्था में शुरू होते हैं।

व्यक्ति की सोच, भावनाएँ और व्यवहार प्रभावित करते हैं, जिससे सामान्य जीवन मुश्किल हो जाता है।

एक चिंताजनक पहलू — आत्महत्या और जोखिमपूर्ण व्यवहार

अक्सर किशोर अपने भावनात्मक दर्द को मुस्कान के पीछे छिपा लेते हैं — मानसिक स्वास्थ्य को समझना और स्वीकारना बेहद ज़रूरी है।”

WHO रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 29 वर्ष के युवाओं में आत्महत्या तीसरा सबसे बड़ा मृत्यु कारण है।

इसके पीछे मुख्य कारण हैं:

✔ सामाजिक दबाव

✔ शराब या नशीली दवाओं का प्रयोग

✔ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी

✔ पारिवारिक टूटन, हिंसा या दुर्व्यवहार

✔ समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कलंक (Stigma)

इसके अलावा, नशीली दवाओं का प्रयोग, हिंसा, असुरक्षित यौन संबंध और सोशल मीडिया के दुरुपयोग जैसी गतिविधियाँ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को और अधिक प्रभावित करती हैं।

समाधान और रोकथाम: क्या कर सकता है समाज?

WHO इस समस्या से निपटने के लिए प्रीवेंशन और सपोर्ट-बेस्ड मॉडल अपनाने की सलाह देता है:

  •  स्कूल आधारित समर्थन:
    जीवन कौशल शिक्षा, भावनात्मक नियंत्रण, तनाव प्रबंधन और सकारात्मक सामाजिक संपर्क जैसी गतिविधियाँ शामिल की जाएँ।
  •  परिवार की भूमिका:
    माता-पिता के साथ स्वस्थ संवाद, सहानुभूति और बिना जज किए सुनना — किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य में सबसे बड़ा योगदान दे सकता है।
  •  डिजिटल और सोशल मीडिया का सही उपयोग:
    ऑनलाइन काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य एप्स और सुरक्षित डिजिटल समुदाय युवाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।

WHO की प्रमुख पहल

“काम, पढ़ाई, रिश्तों और समय की लगातार भागदौड़ — आधुनिक जीवन में मानसिक तनाव का बढ़ता बोझ।”

WHO ने दुनिया भर में किशोर मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं:

कार्यक्रम उद्देश्य

Helping Adolescents Thrive (HAT) स्कूलों और समुदायों में भावनात्मक क्षमता विकसित करना

mhGAP Intervention Guide सामान्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को मानसिक रोग पहचानने और प्रारंभिक उपचार देने में सक्षम बनाना

निष्कर्ष

किशोर मानसिक स्वास्थ्य आज एक वैश्विक प्राथमिकता बन चुका है।
अगर समय रहते लक्षण पहचाने जाएं, सही समर्थन दिया जाए और परिवार, स्कूल और सरकार मिलकर काम करें, तो न केवल मानसिक स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ी एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर और सशक्त समाज का निर्माण कर सकेगी।

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By Divyay

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