Janmashtami सिर्फ़ भगवान कृष्ण का जन्मदिन नहीं है, बल्कि यह वो रात है जब पूरा देश खुशियों में डूब जाता है। कहीं माखन की मटकी फूटती है तो कहीं बांसुरी की मधुर धुन गूंजती है। उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम – देश का हर कोना कृष्ण के रंग में रंगा हुआ है। यह त्यौहार हमें सिखाता है कि मुश्किल समय में भी प्यार, हँसी और उम्मीद का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि जिस तरह कृष्ण का जन्म अंधेरी रात में हुआ था, उसी तरह हर अंधेरे के बाद उजाला आता है।

Janmashtami

Janmashtami भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता  है। लेकिन इस बार 2025 कि Janmashtami में एक twist है — तारीखें दो हैं!

अष्टमी तिथि 15 अगस्त (शुक्रवार) रात 11:49 बजे से शुरू होकर 16 अगस्त (शनिवार) रात 9:34 बजे तक रहेगी।

व्रत से पहले की तैयारी कैसे करे?

  • Janmashtami से एक दिन पहले (सप्तमी) शाम से पहले ही भोजन कर लें और शाम के बाद भोजन न करें।
  •  रात्रि में  जमीन पर सोएँ और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  •  मन, वचन और कर्म से श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए विश्राम करें।
  •  सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले)।
  •  सबसे पहले गुरु और श्रीकृष्ण का स्मरण करें।
  •  पवित्र नदी में स्नान करें, संभव न हो तो गंगाजल से या गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  •  शुद्ध वस्त्र पहनें और मंगला आरती करें (घर या मंदिर में)। ।

व्रत का संकल्प कैसे लेते है?

  •  गंगाजल हाथ में लेकर भगवान से कहें:

  “हे श्रीकृष्ण! मैं आपकी कृपा और शुद्ध भक्ति प्राप्त करने के लिए यह व्रत रख रहा हूँ। कृपया प्रसन्न हों।”

  •  यह गंगाजल तुलसी के पौधे में अर्पित करें।

तुलसी पूजन कैसे करे?

  • तुलसी को गंगाजल मिश्रित जल अर्पित करें।
  •  धूप, दीप, पुष्प अर्पित करें और कम से कम 3 परिक्रमा  आवश्य करें।
  •  “हरे कृष्ण महामंत्र” का 16, 25 या 32 माला जाप करें।

प्रातःकालीन पूजा केसे करे?

  • एक स्वच्छ स्थान पर सफेद या पीला वस्त्र बिछाकर श्री कृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  •  आस-पास रंगोली और अक्षत से सजाएं।
  •  भगवान को धूप, दीप अर्पित कर आरती करें।             

Janmashtami पर श्रीकृष्ण को मुख्य रूप से ये भोग लगाए जाते हैं –

सफेद माखन- मिश्री (श्रीकृष्ण का सबसे प्रिय भोग होता है )।

पंचामृत- दूध, दही, घी, शहद, मिश्री का मिश्रण। पूजा और अभिषेक के बाद प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

सूखे मेवे का प्रसाद - बादाम, काजू, पिस्ता, किशमिश, चिरौंजी आदि को मिश्री या गुड़ के साथ अर्पित किया जाता है।

.पेड़े/ माखन मिश्री लड्डू - दूध और खोए से बने पेड़े, माखन के साथ।

फलाहार - केला, अंगूर, सेब अनार आदि अर्पित किए जाते है।

चरणामृत - पंचामृत मे तुलसी कि पत्ती डालकर भक्तों को दिया जाता है।

 

 सभी भोग सात्विक होते हैं और कई जगह 56 भोग भी अर्पित किए जाते हैं।

Janmastami का महत्व

Janmastami एक बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि अधर्म और अन्याय कितना भी बढ़ जाए, अंत में सत्य और धर्म की ही जीत होती है। श्रीकृष्ण ने अपने जीवन से हमें प्रेम , करुणा, न्याय और कर्म का मार्ग दिखाया।

हम Janmastami इसलिए मनाते हैं क्योंकि यह सिर्फ भगवान के जन्म की खुशी का दिन नहीं है, बल्कि यह अच्छाई की जीत और जीवन में सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। इस दिन व्रत, भजन, झांकी और रासलीला जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से हम भगवान के प्रति अपनी भक्ति और आस्था प्रकट करते हैं।

अंत में, Janmastami का त्योहार हमें सिखाता है कि अगर हम सच्चे दिल से सही राह पर चलें, तो ईश्वर हमेशा हमारे साथ होते हैं। यह दिन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि आत्मिक और नैतिक जागरूकता का प्रतीक भी है।

By Divyay