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नई दिल्ली, 5 दिसंबर 2025 — आज आयोजित 23वें वार्षिक सम्मलेन (Annual Summit) में Vladimir Putin और Narendra Modi ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाले कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान रूस ने भारत को आश्वासन दिया कि ऊर्जा आपूर्ति संकट व पश्चिमी दबाव के बावजूद भारत के लिए तेल, गैस व कोयले की आपूर्ति “बिना किसी रूकावट” जारी रहेगी।

Summit
16 नए समझौते — रक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य से लेकर मीडिया तक

सम्मेलन में कुल 16 समझौते (MoUs/Agreements) हुए, जिनमें शामिल हैं: रक्षा-सहयोग, वाणिज्य व व्यापार, आर्थिक साझेदारी, स्वास्थ्य, कृषि, श्रम-गतिशीलता, मीडिया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान।

दोनों देशों ने तय किया है कि वे रक्षा उपकरणों, उर्वरकों, मेडिकल उपकरणों, शिपिंग एवं टेक्सटाइल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और निवेश बढ़ाएंगे। साथ ही, 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को US$ 100 billion तक ले जाने का लक्ष्य तय हुआ है।

ऊर्जा सुरक्षा — रूस ने दिया भरोसा

रूस ने स्पष्ट किया है कि पश्चिमी प्रतिबंधों या राजनीतिक दबाव के बावजूद भारत को ऊर्जा आपूर्ति से नहीं जोड़ा जाएगा। Putin ने कहा कि रूस “भारत के विकास और ऊर्जा-सेक्टर की ज़रूरतों” का पूरा ध्यान रखेगा और भारत-रूस साझेदारी को “बीतरह महत्वपूर्ण सहयोग” माना जाएगा।

प्रधानमंत्री Modi ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी भारत-रूस रिश्तों का मजबूत स्तंभ है। उन्होंने भरोसा जताया कि ये समझौते दोनों देशों को आने वाले वैश्विक भू–राजनीति व आर्थिक चुनौतियों में मजबूती देंगे।

रक्षा सहयोग और आत्मनिर्भरता की ओर

रक्षा-क्षेत्र में, दोनों देशों ने आधुनिक सैनिक उपकरणों के सह-निर्माण और तकनीकी साझेदारी को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। खासकर भारत के आत्मनिर्भर रक्षा विक्रय (Aatmanirbhar Bharat) दृष्टिकोण के तहत रूस ने उपकरण आपूर्ति व को-प्रोडक्शन के प्रस्तावों को समर्थन देने का भरोसा दिया है।

इस साझेदारी से भारत को न केवल रक्षा बलों की आधुनिकता मिलेगी, बल्कि रक्षा उत्पादन में घरेलू उद्योगों को भी नई बल मिलने की संभावना है।

वैश्विक सन्दर्भ — पश्चिमी दबाव के बीच भारत का रणनीतिक संतुलन

यह सम्मेलन उस समय हो रहा है, जब रूस पर युद्ध और आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव है, और कई पश्चिमी देशों ने भारत से रूस से दूरी बनाने का आग्रह किया है। ऐसे में India-Russia Summit इस बात का संकेत है कि भारत अपनी विदेश नीति में “स्वतंत्रता” के पक्ष में बना हुआ है।

विश्लेषकों का कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक या रक्षा समझौते नहीं—बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में भारत के आत्मनिर्भर और स्वंतंत्र विदेश नीति के आत्मविश्वास का प्रतीक है।

Putin
भारत की कूटनीतिक स्थिति हुई और मज़बूत

विशेषज्ञों का मानना है कि इस शिखर वार्ता ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत किया है। पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद रूस का भारत को प्राथमिकता देना दर्शाता है कि नई दिल्ली अब वैश्विक ऊर्जा, रक्षा और भू-राजनीतिक समीकरणों में एक निर्णायक खिलाड़ी बन चुकी है। विश्लेषकों का कहना है कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में Indo-Pacific और Eurasia दोनों क्षेत्रों में भारत की भूमिका को और विस्तार देगी।

क्या है अगली रुपरेखा?

आने वाले कुछ महीनों में रक्षा, ऊर्जा, कृषि, टेक्नोलॉजी और स्वास्थ्य क्षेत्रों में इन समझौतों को व्यवहार में लाया जाएगा।

दोनों देशों ने $100 billion व्यापार लक्ष्य 2030 तक हासिल करने की रूपरेखा तैयार की है।

भारत-रूस संयोजित विनिर्माण (co-production) व निवेश परियोजनाओं पर विशेष काम करेगा।

विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा रणनीति में भारत अपनी प्राथमिकता व हितों के अनुसार स्व-निर्भर होकर आगे बढ़ने की दिशा में मजबूत कदम उठा रहा है।

निष्कर्ष

Russia और India की यह फरवरी 2025 की Summit केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं रही—बल्कि यह एक नया राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक बयान है। Russia की ऊर्जा आपूर्ति की गारंटी, विस्तारित व्यापार समझौते और रक्षा-सहयोग से यह स्पष्ट होता है कि 21वीं सदी में भारत-रूस रिश्ता सिर्फ पारंपरिक दोस्ती नहीं, बल्कि आधुनिक और बहु-आयामी साझेदारी की ओर बढ़ रहा है।

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By Divyay

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