27 सितंबर 2025 — आज Google अपना 27वां जन्मदिन मना रहा है।
1998 में दो छात्रों द्वारा स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक छोटे-से हॉस्टल रूम में शुरू हुई एक रिसर्च प्रोजेक्ट ने आज पूरे डिजिटल दुनिया की दिशा बदल दी है। सिर्फ कुछ कंप्यूटरों और एक अनोखे आइडिया से शुरू हुई यह यात्रा आज दुनिया के सबसे बड़े और प्रभावशाली टेक साम्राज्यों में से एक में बदल चुकी है।Google की कहानी केवल एक सर्च इंजन की नहीं है, बल्कि यह है दूरदर्शी सोच, साहसिक कदमों और लगातार नवाचार की कहानी। इस यात्रा में कहीं न कहीं स्टीव जॉब्स जैसे महान टेक लीजेंड का भी अप्रत्यक्ष योगदान और प्रभाव नज़र आता है, जिसने उस दौर की पूरी टेक्नोलॉजी सोच को नई दिशा दी।
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Toggleस्टैनफोर्ड(Stanford) की मुलाकात जिसने बदल दी इंटरनेट की दिशा (1995–1998)
1995 में लैरी पेज (Larry Page) नाम का एक छात्र मिशिगन यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी आया। वहां उसका परिचय सर्गेई ब्रिन (Sergey Brin) से हुआ, जो पहले से स्टैनफोर्ड में पढ़ रहा था। शुरुआत में दोनों की बहस होती थी, लेकिन धीरे-धीरे उनकी बातचीत ने एक नए और क्रांतिकारी आइडिया को जन्म दिया।
उस समय इंटरनेट पर बहुत सारी वेबसाइटें थीं, लेकिन सर्च इंजन बहुत कमजोर थे।
Yahoo!, Lycos और AltaVista जैसे सर्च इंजन केवल पेज लिस्ट कर देते थे, लेकिन यह तय नहीं कर पाते थे कि कौन-सी वेबसाइट सबसे बेहतर है। लैरी और सर्गेई ने सोचा कि अगर वेबसाइटों के लिंक का गहराई से विश्लेषण किया जाए, तो सर्च रिज़ल्ट और भी सटीक बनाए जा सकते हैं।
उन्होंने अपने हॉस्टल के कमरे को ही एक छोटा सर्वर रूम बना लिया। पुरानी कंप्यूटर मशीनों को जोड़कर उन्होंने एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जो वेबसाइटों की बैकलिंक को गिनकर उनकी रैंक तय करता था।
उन्होंने इस प्रोजेक्ट का नाम रखा “Backrub”, और 1998 में इसका नाम बदलकर रखा “Google” — जो ‘Googol’ नामक गणितीय शब्द से लिया गया था (1 के बाद 100 ज़ीरो), यानी अनंत जानकारी को व्यवस्थित करने का सपना।
Google की कहानी में स्टीव जॉब्स का अप्रत्यक्ष लेकिन गहरा योगदान
अब सवाल आता है — Google की कहानी में Steve Jobs कहां आते हैं?
स्टीव जॉब्स ने 1970–80 के दशक में Apple के ज़रिए टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक नई सोच दी — “टेक्नोलॉजी को इंसानों के लिए आसान और सुंदर बनाना”। Macintosh कंप्यूटर और Apple II ने आम लोगों तक कंप्यूटर को पहुँचाया और टेक्नोलॉजी को आम जीवन का हिस्सा बनाया।
लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन, दोनों स्टीव जॉब्स की सोच और डिज़ाइन फिलॉसफी से गहराई से प्रभावित थे। उन्होंने हमेशा कहा कि तकनीक सिर्फ पावरफुल नहीं, बल्कि सरल, साफ और सहज होनी चाहिए।
Google का शुरुआती होमपेज — सिर्फ एक सर्च बॉक्स, बिना किसी विज्ञापन या रंग-रोगन के — इसी सोच का परिणाम था।
1997 में जब स्टीव जॉब्स दोबारा Apple में लौटे, तब सिलिकॉन वैली में नवाचार की एक नई लहर दौड़ी। Google का जन्म इसी दौर में हुआ, जब नई सोच और प्रयोगों का माहौल चरम पर था।
आगे चलकर Google के CEO एरिक श्मिट (Eric Schmidt) Apple के बोर्ड में शामिल हुए। एक समय ऐसा भी आया जब Apple और Google साथ-साथ भविष्य की तकनीक को दिशा दे रहे थे, और इन दो दिग्गजों की आपसी सोच ने डिजिटल दुनिया का नक्शा ही बदल दिया।
Google का तेज़ उभार: एक सर्च इंजन से टेक साम्राज्य तक
2000 के शुरुआती दशक में Google ने सभी सर्च इंजनों को पीछे छोड़ दिया।
इसकी तेज़ स्पीड, साफ-सुथरा डिज़ाइन और सटीक परिणामों ने इसे बहुत कम समय में ही यूज़र्स की पहली पसंद बना दिया।
इसके बाद आया Google AdWords (2000) — एक ऐसा सिस्टम जिसने ऑनलाइन विज्ञापन की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया। कंपनियां कीवर्ड पर बोली लगाकर विज्ञापन दिखाने लगीं और Google की कमाई में जबरदस्त उछाल आया।
इसके बाद Google ने एक-एक कर कई क्रांतिकारी प्रोडक्ट्स लॉन्च किए, जिन्होंने इंटरनेट की दिशा बदल दी:
- Gmail (2004) — ईमेल को नया और तेज़ रूप दिया
- Google Maps (2005) — रास्ते ढूंढना और नेविगेशन बेहद आसान बना दिया
- YouTube (2006) — वीडियो की दुनिया पर कब्जा किया और नया युग शुरू किया
- Android (2005 में अधिग्रहित) — आज अरबों मोबाइल इसी ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलते हैं
- Chrome ब्राउज़र (2008) — दुनिया का सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद ब्राउज़र बन गया
और आज Google सिर्फ सर्च तक सीमित नहीं है, बल्कि AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, हार्डवेयर और हेल्थ टेक्नोलॉजी जैसे कई क्षेत्रों में भी उसकी गहरी पकड़ है। इस विस्तार ने Google को एक सर्च इंजन से एक विशाल टेक साम्राज्य में बदल दिया।
Google की असली ताकत: प्रोडक्ट्स नहीं, दूरदर्शी सोच और मिशन
Google की ताकत सिर्फ उसके प्रोडक्ट्स में नहीं थी, बल्कि उसकी सोच में थी।
उसका मिशन था — “दुनिया की जानकारी को व्यवस्थित करना और उसे सभी के लिए सुलभ व उपयोगी बनाना।”
लैरी पेज हमेशा बड़े और मुश्किल सवालों को सुलझाने की बात करते थे, जबकि सर्गेई ब्रिन प्रयोगों और नई संभावनाओं पर भरोसा करते थे।
यही अनोखी सोच और साहस Google को एक छोटे स्टार्टअप से ट्रिलियन डॉलर की कंपनी में बदलने की सबसे बड़ी ताकत बनी।
27 साल बाद: Google एक कंपनी नहीं, बल्कि हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा
आज Google सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि हमारे रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुका है — चाहे सर्च करना हो, रास्ता ढूंढना हो, वीडियो देखना हो, या कुछ नया सीखना हो, Google हर जगह मौजूद है।स्टीव जॉब्स ने एक बार कहा था — “Innovation distinguishes between a leader and a follower” — यानी नवाचार ही एक नेता और अनुयायी में फर्क करता है।
लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने इसी सोच को अपनाकर Google को एक नई दिशा दी, जिसने पूरी डिजिटल दुनिया का चेहरा बदल दिया।
निष्कर्ष
आज Google सिर्फ तकनीक बनाने वाली कंपनी नहीं, बल्कि वह एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन चुका है जिसने पूरी दुनिया को जोड़ दिया है। इसकी सेवाएं सीमाओं, भाषाओं और संस्कृतियों से परे जाकर लोगों को ज्ञान, अवसर और नवाचार से जोड़ती हैं। छोटे शहरों से लेकर ग्लोबल कंपनियों तक — हर कोई किसी न किसी रूप में Google पर निर्भर है। यही वजह है कि Google अब केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन की धड़कन बन चुका है।
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