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Toggle12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में घर-घर सर्वेक्षण होगा, अंतिम सूची फरवरी 2026 तक
भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) ने देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की घोषणा की है।
यह कदम मतदाता सूची को और अधिक सटीक, अद्यतन और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस अभियान के दूसरे चरण में 12 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल किए गए हैं, जहाँ नवंबर से दिसंबर 2025 के बीच घर-घर सर्वेक्षण किया जाएगा।
कौन-कौन से राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं
दूसरे चरण में शामिल राज्य और केंद्रशासित प्रदेश हैं:
उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, केरल, छत्तीसगढ़, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप।
ये राज्य और केंद्रशासित प्रदेश जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और राजनीतिक दृष्टि से विविध हैं।
उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य जहाँ लाखों नए मतदाता हर वर्ष जुड़ते हैं, वहीं केरल, गोवा और पुडुचेरी जैसे छोटे क्षेत्र भी इस प्रक्रिया में समान रूप से शामिल हैं।
निर्वाचन आयोग का उद्देश्य है कि हर पात्र नागरिक, चाहे वह किसी भी राज्य या क्षेत्र से हो, मतदाता सूची में शामिल हो सके।
प्रमुख तिथियाँ और समयसीमा
भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए पूरा शेड्यूल जारी किया है। इसमें हर चरण की तिथि और उसका उद्देश्य स्पष्ट किया गया है —
| चरण | कार्य विवरण | तारीखें |
|---|---|---|
| 1 | प्रिंटिंग और प्रशिक्षण (Printing / Training) | 28 अक्टूबर – 3 नवंबर 2025 |
| 2 | घर-घर सर्वेक्षण (House-to-house Enumeration) | 4 नवंबर – 4 दिसंबर 2025 |
| 3 | प्रारंभिक सूची का प्रकाशन (Draft Roll Publication) | 9 दिसंबर 2025 |
| 4 | दावा और आपत्ति अवधि (Claims & Objections) | 9 दिसंबर 2025 – 8 जनवरी 2026 |
| 5 | सुनवाई और सत्यापन (Hearings & Verification) | 9 दिसंबर 2025 – 31 जनवरी 2026 |
| 6 | अंतिम सूची का प्रकाशन (Final Roll Publication) | 7 फरवरी 2026 |
आयोग का कहना है कि इस बार पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जनसहभागिता और सटीकता पर विशेष ध्यान दिया गया है।
हर जिले के अधिकारियों को पहले से प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या तकनीकी गड़बड़ी की संभावना न्यूनतम हो।
दस्तावेज़ की आवश्यकता नहीं होगी
निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा बदलाव करते हुए यह स्पष्ट किया है कि घर-घर सर्वेक्षण के दौरान किसी भी दस्तावेज़ की आवश्यकता नहीं होगी।
मतदाता से केवल मूल जानकारी ली जाएगी, जैसे नाम, आयु, लिंग, पता और परिवार के सदस्यों का विवरण।
हालांकि, यदि बाद में किसी जानकारी की पुष्टि या सुधार की आवश्यकता होगी, तब निम्नलिखित दस्तावेज़ प्रस्तुत किए जा सकते हैं —
- जन्म प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट या सरकारी पहचान पत्र
- पेंशन या कर्मचारी पहचान पत्र
- शैक्षणिक प्रमाण पत्र (मैट्रिक या उससे ऊपर)
- स्थायी निवास प्रमाण पत्र
- भूमि या मकान आवंटन पत्र
- जाति प्रमाण पत्र (OBC/SC/ST)
- वनाधिकार प्रमाण पत्र
- 1987 से पहले जारी प्रमाण पत्र
- स्थानीय निकायों द्वारा तैयार रजिस्टर
- आधार कार्ड (निर्वाचन आयोग की 9 सितंबर 2025 की अधिसूचना के अनुसार)
निर्वाचन आयोग ने कहा कि यह सूची संकेतात्मक (indicative) है — अर्थात अन्य वैध दस्तावेज़ भी स्वीकार किए जा सकते हैं।
यह पुनरीक्षण क्यों किया जा रहा है
भारत में चुनावी प्रक्रिया का आधार ही सटीक मतदाता सूची है।
मतदाता सूची में अक्सर नई प्रविष्टियाँ जोड़ने, मृत व्यक्तियों के नाम हटाने और पता परिवर्तन के मामलों को अद्यतन करने की आवश्यकता होती है।
आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया —
“यह विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया इसलिए जरूरी है ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम सूची से छूट न जाए और साथ ही त्रुटिपूर्ण या निष्क्रिय प्रविष्टियाँ हटाई जा सकें।”
इस अभियान का उद्देश्य केवल सूची को अपडेट करना नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता को और मज़बूत बनाना है।
मतदाताओं के लिए दिशा-निर्देश
आयोग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें।
- 9 दिसंबर 2025 को जारी प्रारंभिक मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जांचें।
- अगर नाम गायब है या विवरण गलत है, तो 9 दिसंबर से 8 जनवरी 2026 के बीच दावा या आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।
- आवश्यक दस्तावेज़ (यदि मांगे जाएँ) तैयार रखें।
- किसी भी अफवाह या भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें — केवल निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय सूचना केंद्रों पर भरोसा करें।
राज्य प्रशासन की तैयारियाँ
राज्य निर्वाचन अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन और जिला अधिकारियों को तैयारी के निर्देश दे दिए हैं।
गांवों, झुग्गी बस्तियों और दुर्गम इलाकों में विशेष टीमें बनाई जा रही हैं।
कर्मचारियों को टैबलेट-आधारित डेटा एंट्री सिस्टम से जोड़ा जा रहा है ताकि वास्तविक समय में जानकारी दर्ज की जा सके।
साथ ही, सार्वजनिक जागरूकता के लिए रेडियो, टेलीविजन और सोशल मीडिया पर अभियान चलाया जाएगा, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के नागरिक इस प्रक्रिया से अवगत रह सकें।
संभावित चुनौतियाँ
इतने बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण करते समय कई व्यावहारिक चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
- प्रवासी जनसंख्या — जो लोग अस्थायी रूप से अन्य राज्यों या शहरों में रह रहे हैं, उनकी जानकारी सही तरीके से दर्ज करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
- डुप्लीकेट नामों का जोखिम — एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर न जुड़ जाए, इसके लिए तकनीकी निगरानी आवश्यक होगी।
- मानव संसाधन — लाखों घरों तक पहुँचने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या और निगरानी एक बड़ा कार्य है।
- समयसीमा का पालन — सभी चरणों को तय समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए सबसे अहम चुनौती है।
आयोग ने इन सभी बिंदुओं पर पहले से योजनाबद्ध रणनीति तैयार की है और कहा है कि सत्यापन और सुनवाई चरण में त्रुटियों को सुधारा जा सकेगा।
राजनीतिक और सामाजिक महत्त्व
राजनीतिक दृष्टि से यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें वे राज्य शामिल हैं जहाँ निकट भविष्य में बड़े चुनाव होने हैं — जैसे उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु।
सटीक मतदाता सूची न केवल मतदान की प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाती है बल्कि राजनीतिक दलों के लिए अभियान रणनीति तय करने में भी सहायक होती है।
चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इस बार निर्वाचन आयोग पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर अधिक सतर्क है, ताकि मतदाता सूची पर किसी प्रकार का विवाद न उठे।
आगे का रास्ता
7 फरवरी 2026 को जब अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी, तब इसे अगले चुनावों के लिए आधार माना जाएगा।
आयोग ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में तीसरा चरण भी शुरू किया जाएगा, जिसमें शेष राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया जाएगा।
> “हमारा लक्ष्य है कि देश की हर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची त्रुटिरहित और अद्यतन हो,”
एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने कहा।
निष्कर्ष
भारत निर्वाचन आयोग का यह कदम लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
मतदाता सूची का नियमित अद्यतन न केवल तकनीकी प्रक्रिया है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा विषय भी है।
फरवरी 2026 तक जारी होने वाली अंतिम सूची यह सुनिश्चित करेगी कि हर पात्र भारतीय नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे।
> “एक सटीक मतदाता सूची ही एक निष्पक्ष चुनाव की पहली शर्त है।”
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