त्योहारों की रौनक बढ़ रही है, लेकिन राजधानी की हवा फिर से धुंधली पड़ने लगी है। दीवाली से पहले ही Delhi की हवा में प्रदूषण का ज़हर घुल चुका है।
Air Quality Index (AQI) आज सुबह 157 दर्ज किया गया — यानी हवा “Severe” श्रेणी में पहुँच चुकी है।
जहाँ रोशनी और खुशियों की तैयारियाँ चल रही हैं, वहीं दिल्लीवासियों के सामने अब असली चुनौती है — सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।
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ToggleDelhi की हवा फिर जहरीली: दिवाली के बाद AQI ने दी चेतावनी की घंटी
एक बार फिर सांसों में जहर — अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट
Delhi की हवा ने एक बार फिर शहर को चिंतन के मोड़ पर खड़ा कर दिया है।
दिवाली की खुशियों के कुछ ही दिन बाद राजधानी की हवा में जश्न की जगह धुंध और जहरीले कणों ने ले ली।
16 अक्टूबर की सुबह आनंद विहार का AQI 339 दर्ज किया गया — “Very Poor” श्रेणी से ऊपर पहुँचता हुआ।
Delhi सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, यह वही स्तर है जहाँ हवा हर सांस के साथ शरीर पर असर डालना शुरू कर देती है।
14 अक्टूबर को ही प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए GRAP-1 (Graded Response Action Plan) लागू किया गया था,
जब AQI 211 तक पहुँच गया था — जो “Poor” श्रेणी में आता है।
प्रदूषण के पीछे के असली कारण
इस बार का प्रदूषण सिर्फ एक वजह से नहीं, बल्कि कई समानांतर कारणों से उपजा है।
- पराली जलना (Stubble Burning):पंजाब और हरियाणा के खेतों से उठता धुआं अब भी दिल्ली की हवा में शामिल हो रहा है।
सैटेलाइट इमेज में इन इलाकों से 2,400 से अधिक fire points दर्ज हुए। - वाहनों और उद्योगों से उत्सर्जन: दिल्ली में करीब 1.2 करोड़ पंजीकृत वाहन हैं। डीज़ल ट्रकों, जेनरेटर और निर्माण स्थलों का धुआं मिलकर PM2.5 को बढ़ा रहा है।
- मौसमी और भौगोलिक परिस्थितियाँ: अक्टूबर के ठंडे रातों और धीमी हवाओं में तापमान इन्वर्शन होता है — जिससे धूल और धुआं जमीन के करीब फँस जाता है।
- त्योहार और आतिशबाज़ी: भले ही कई इलाकों में पटाखों पर प्रतिबंध था, फिर भी दिवाली की रात प्रदूषण में औसतन 150 अंकों का उछाल दर्ज किया गया।
जब सांसें भी बोझ लगने लगें — स्वास्थ्य पर असर
AQI 300 से ऊपर पहुँचने का अर्थ है — हवा में मौजूद हर कण शरीर के लिए हानिकारक हो जाता है।
बच्चे: खांसी, आँखों में जलन, नींद में रुकावट।
बुज़ुर्ग: सांस फूलना, अस्थमा और हार्ट अटैक का खतरा।
सामान्य जन: सिरदर्द, थकान और लंबे समय में फेफड़ों की क्षमता घट जाना।
AIIMS के डॉक्टरों के अनुसार, यदि AQI लगातार 350 से ऊपर बना रहता है,
तो “सामान्य स्वस्थ व्यक्ति भी 5 सिगरेट रोज़ पीने के बराबर हवा में सांस ले रहा होता है।”
आंकड़े जो Delhi हवा की कहानी कहते हैं
तारीख स्थान AQI श्रेणी
16 अक्टूबर आनंद विहार 339 Very Poor
20 अक्टूबर औसत दिल्ली AQI PM2.5 – 255 µg/m³, PM10 – 330 µg/m³ Hazardous
14 अक्टूबर GRAP लागू 211 Poor
सितंबर मध्य शहर औसत 140–160 Moderate
सितंबर तक Delhi दुनिया के शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रही थी।
और वर्ष 2025 में अब तक केवल 5–6 दिन ऐसे रहे, जब वायु गुणवत्ता “संतोषजनकल्ली” रही।
सरकार की पहलें और उनके नतीजे
राज्य और केंद्र सरकार दोनों ही स्तरों पर कई कदम उठाए गए हैं — लेकिन नतीजे अभी सीमित हैं।
“एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन प्लान 2025”
जून 2025 में लॉन्च इस योजना के तहत दिल्ली में सभी हाई-राइज़ बिल्डिंग्स, होटल्स और मॉल्स में एंटी-स्मॉग गन्स लगाना अनिवार्य किया गया।
GRAP (Graded Response Action Plan)
इस योजना के तहत हवा की स्थिति के अनुसार चार चरणों में कार्रवाई की जाती है —
Stage 1 (Poor) में निर्माण स्थलों पर प्रतिबंध,Stage 2 (Very Poor) में डीजल वाहनों पर रोक, और Stage 3 (Severe) में स्कूल बंद करने तक की संभावना रहती है।
एयर प्यूरीफाइंग टॉवर्स
कनॉट प्लेस और आनंद विहार जैसे इलाकों में टॉवर लगाए गए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इनका असर “बहुत सीमित रेडियस (100 मीटर)” तक ही रहता है।
चुनौतियाँ जो हर साल दोहराई जाती हैं
Every Year, #Diwali gets blamed for a #Pollution. Yes, pollution level spikes for a day or two, but it quickly drop back again.
— Gaurav Taneja (@flyingbeast320) October 21, 2025
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Bigger Problem- Already Polluted air caused by other factors including Stubble burning.
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Due to unfortunate floods in Punjab, Stubble burning is down… pic.twitter.com/2O53SrWyxE
- राज्य-सीमाओं का टकराव: पराली जलाने पर दिल्ली सरकार कुछ नहीं कर सकती, जबकि उसका असर सीधे राजधानी पर होता है।
- धूल और निर्माण: शहर में हर जगह निर्माण कार्य जारी है — और हर ट्रक हवा में नई धूल जोड़ता है।
- व्यवहारिक बदलाव की कमी: वाहन कम चलाना या सार्वजनिक परिवहन अपनाना अब भी आम नागरिक की प्राथमिकता नहीं है।
भविष्य की दिशा — राहत या केवल आशा?
विशेषज्ञों का मानना है कि Delhi के लिए short-term solutions अब काम नहीं करेंगे।
जरूरत है सिस्टमेटिक बदलावों की —
इलेक्ट्रिक वाहनों को तेज़ी से अपनाना
24×7 निर्माण निगरानी प्रणाली
हर वार्ड में माइक्रो एम्बिएंट एयर मॉनिटरिंग स्टेशन लगाना
और सबसे ज़रूरी — नागरिक जागरूकता
पर्यावरण कार्यकर्ता रिया सेठ के शब्दों में —
“Delhi में अब हवा केवल सांस का मुद्दा नहीं, बल्कि नीति और नागरिकता का परीक्षण बन चुकी है।”
नागरिकों के लिए सावधानियाँ
- बाहर जाते समय N95 या N99 मास्क पहनें।
- सुबह के समय या ट्रैफिक घंटों में वॉक से बचें।
- घर में एयर-प्यूरीफायर या एलोवेरा, स्नेक प्लांट जैसे पौधे लगाएँ।
- पटाखों और लकड़ी जलाने से बचें।
- सार्वजनिक परिवहन और कारपूल का उपयोग करें।
निष्कर्ष — अब हवा का नहीं, सोच का परिवर्तन ज़रूरी है
दिल्ली की हवा हर साल एक ही संदेश देती है —
“प्रदूषण सिर्फ सरकार की नहीं, हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है।”
अक्टूबर 2025 ने यह साफ़ कर दिया है कि “स्मॉग सीज़न” अब सर्दियों से पहले ही शुरू हो चुका है।अगर अब भी हमने ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा एक लक्ज़री बन जाएगी — अधिकार नहीं।
और शायद यह सच्चाई हमें हर साल याद दिलाती रहे —
“दीए जलें या न जलें, पर अगर हवा बुझ गई,
तो रौशनी भी टिक नहीं पाएगी।”
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जहाँ आर्थिक सहयोग के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों पर भी चर्चा बढ़ रही है।
