Darjeeling, 5 अक्टूबर 2025 — पश्चिम बंगाल के Darjeeling और कालिम्पोंग ज़िले में लगातार हो रही भारी बारिश ने शनिवार को बड़े पैमाने पर भूस्खलन को जन्म दिया, जिससे अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है और 2 लोग लापता बताए जा रहे हैं। भूस्खलन ने घरों को बहा दिया, पुलों को तोड़ दिया और कई गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह काट दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस त्रासदी पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार प्रभावित क्षेत्रों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी। राज्य और केंद्र की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।
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Toggleलगातार बारिश से ढही Darjeeling की ढलानें
I am deeply worried and concerned that several areas in both North Bengal and South Bengal have been flooded due to sudden huge rains within a few hours last night as well as due to rush of excessive river waters in our State from outside.
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) October 5, 2025
Yesterday night there was sudden…
पिछले 24 घंटे से हो रही मूसलाधार बारिश ने Darjeeling की पहाड़ियों को अस्थिर कर दिया। Mirik–Sukhiapokhri मार्ग समेत कई इलाकों में भूस्खलन हुआ, जिसमें बड़े पैमाने पर मिट्टी और मलबा बहकर नीचे बस्तियों में आ गया। कई घर मलबे में दब गए और लोग रातोंरात बेघर हो गए।
प्रभावित इलाकों में Sarsaly, Jasbirgaon, Mirik Basti, Dhar Gaon (Mechi) और Mirik Lake Area शामिल हैं — जहां सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह Darjeeling का हाल के वर्षों में सबसे भीषण भूस्खलन है।
9 की मौत, 2 लोग लापता — राहत कार्य जारी
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा 2 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है।
NDRF (National Disaster Response Force), राज्य आपदा प्रबंधन बल, पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवक रात-दिन मलबा हटाने और फंसे लोगों को बचाने में लगे हुए हैं। लगातार बारिश और फिसलन भरी ज़मीन राहतकर्मियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
गांव कटे बाहरी दुनिया से, पुल और सड़कें तबाह
भूस्खलन ने Darjeeling की महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों को भी तहस-नहस कर दिया।
- Dudhia Iron Bridge (Balason नदी पर) पूरी तरह ढह गया है।
- Pulbazar Bridge समेत कई अन्य पुलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
- NH-10 (Darjeeling–Siliguri मार्ग) को कई जगहों पर बंद कर दिया गया है।
कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। मलबा और टूटी सड़कों के कारण राहत सामग्री पहुंचाना बेहद मुश्किल हो गया है।
पीएम मोदी का शोक संदेश और मदद का वादा
Deeply pained by the loss of lives due to a bridge mishap in Darjeeling. Condolences to those who have lost their loved ones. May the injured recover soon.
— Narendra Modi (@narendramodi) October 5, 2025
The situation in Darjeeling and surrounding areas is being closely monitored in the wake of heavy rains and landslides. We…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“Darjeeling और आसपास के इलाकों में भारी बारिश और भूस्खलन से जानमाल के नुकसान से गहरा दुख हुआ है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। केंद्र सरकार हर संभव मदद प्रदान करेगी।”
उन्होंने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि तकनीकी, वित्तीय और मानव संसाधन की मदद तत्काल उपलब्ध कराई जाए। स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
राज्य सरकार और प्रशासन की तेज़ कार्रवाई
पश्चिम बंगाल सरकार ने तुरंत आपदा प्रबंधन टीम, पुलिस बल और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया।
अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं।
विस्थापित लोगों को खाना, पानी और दवाइयाँ दी जा रही हैं।
स्वास्थ्य टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में घूमकर घायलों को चिकित्सा सहायता दे रही हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए Darjeeling का दौरा करने की घोषणा की है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रभावित परिवार को मदद से वंचित न रखा जाए।
पर्यटन स्थलों को किया गया बंद
Gorkhaland Territorial Administration (GTA) ने Darjeeling के Tiger Hill, Rock Garden समेत सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है।
इसके साथ ही बंगाल पुलिस ने एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है ताकि फंसे हुए पर्यटक और स्थानीय लोग मदद मांग सकें।
राहत कार्य में चुनौतियां
राहत और बचाव अभियानों को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:
- लगातार हो रही बारिश के कारण नए भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
- रास्ते मलबे से भरे हैं, जिससे भारी मशीनरी को लाना मुश्किल हो रहा है।
- कुछ क्षेत्रों में बिजली और मोबाइल नेटवर्क ठप है, जिससे समन्वय में दिक्कतें आ रही हैं।
IMD (India Meteorological Department) ने Darjeeling और आसपास के पहाड़ी इलाकों में “रेड अलर्ट” जारी किया है और अगले 48 घंटे में और भूस्खलन की संभावना जताई है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: मानवीय गतिविधियां भी ज़िम्मेदार
विशेषज्ञों का कहना है कि Darjeeling में ऐसी आपदाओं के पीछे केवल प्राकृतिक कारण नहीं, बल्कि मानव गतिविधियां भी एक बड़ा कारण हैं।
- अनियंत्रित निर्माण कार्य
- वनों की कटाई
- ढलानों की सही देखभाल न होना
इन सभी ने पहाड़ियों को अस्थिर बना दिया है।
भूवैज्ञानिक डॉ. अभिषेक राय ने कहा:
“Darjeeling की पहाड़ियों पर बिना योजना के निर्माण और जल निकासी की कमी ने भूस्खलन की घटनाओं को लगातार बढ़ा दिया है। अब ये कभी-कभार की नहीं बल्कि नियमित आपदाएं बनती जा रही हैं।”
निष्कर्ष: चेतावनी की घंटी है यह त्रासदी
Darjeeling में हुआ यह भूस्खलन केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन, लापरवाही और अव्यवस्थित विकास का परिणाम है।
आने वाले समय में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ज़रूरी है कि:
- लैंडस्लाइड प्रोन ज़ोन की पहचान की जाए
- निर्माण पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए
- ढलानों को स्थिर करने के उपाय किए जाएं
- अर्ली वार्निंग सिस्टम और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार हो
यह त्रासदी एक बार फिर चेतावनी की घंटी बजा रही है कि अगर अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो Darjeeling और इसके आसपास के क्षेत्र भविष्य में और भी बड़ी तबाहियों के गवाह बन सकते हैं।
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