CP Radhakrishnan

9 सितंबर 2025 को भारत में उपराष्ट्रपति के चुनाव का आयोजन किया गया। यह चुनाव इस पद की रिक्ति को भरने के लिए था, जो तब खाली हुई जब वर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों के चलते इस्तीफा दे दिया। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए और विपक्ष के उम्मीदवारों के बीच था, और इसे पूरे देश में राजनीतिक महत्व का एक बड़ा अवसर माना गया।

CP Radhakrishnan

इस उपराष्ट्रपति चुनाव में CP Radhakrishnan और B. Sudershan Reddy मुख्य दावेदार थे।

  • CP Radhakrishnan एनडीए (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन) के उम्मीदवार थे। वह पूर्व में बीजेपी के सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं। उनके अनुभव और राजनीतिक पृष्ठभूमि ने उन्हें एनडीए के लिए मजबूत दावेदार बनाया।

  • B. Sudershan Reddy विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के उम्मीदवार थे। वह विपक्ष की तरफ से उम्मीदवार बने और उन्होंने चुनाव में अपनी पकड़ और अनुभव के आधार पर मुकाबला किया।

यह चुनाव दोनों उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि यह उपराष्ट्रपति पद पर बैठने का अवसर था और भारतीय राजनीति में संतुलन बनाए रखने का माध्यम भी।

उपराष्ट्रपति चुनाव में CP Radhakrishnan की जीत, NDA का दबदबा कायम

उपराष्ट्रपति चुनाव में कुल वोटिंग के बाद CP Radhakrishnan को 452 वोट मिले, जबकि B. Sudershan Reddy को 300 वोट प्राप्त हुए।

इस परिणाम के साथ, CP Radhakrishnan भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में चुने गए। यह जीत एनडीए के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता मानी जा रही है और अगले पांच वर्षों तक उपराष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल निश्चित करती है।

NDA को संवैधानिक पदों में बढ़त, CP Radhakrishnan चुने गए उपराष्ट्रपति

CP Radhakrishnan की जीत एनडीए के लिए संवैधानिक पदों पर प्रभाव बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

राधाकृष्णन को गैर-विवादास्पद और आरएसएस के विचारों के अनुकूल माना जाता है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि उनके उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए संसदीय प्रक्रियाओं और संवैधानिक व्यवस्थाओं में एनडीए का असर और बढ़ सकता है।

उपराष्ट्रपति की भूमिका

भारत में उपराष्ट्रपति का मुख्य कर्तव्य राज्यसभा के कार्यकारी अध्यक्ष (Ex-officio Chairman of the Rajya Sabha) के रूप में होता है।

अगर राष्ट्रपति पद खाली हो जाता है, तो उपराष्ट्रपति अस्थायी रूप से राष्ट्रपति का कामकाज संभालते हैं।

हालांकि, असली कार्यकारी शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती है, और उपराष्ट्रपति का रोल मुख्यतः सांविधिक और विधायी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण होता है।

निष्कर्ष 

सी.पी. राधाकृष्णन का चुनाव भारत के संवैधानिक ढांचे में स्थिरता और निरंतरता सुनिश्चित करता है।

यह कदम राज्यसभा संचालन और राष्ट्रपति अस्थायी कार्यपालन में सुचारू व्यवस्था बनाए रखने में मदद करेगा, साथ ही राजनीतिक संतुलन को भी मजबूती देगा।

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By Divyay

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