इस साल Choti diwali, जिसे नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi) या रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है,
रविवार, 19 अक्टूबर 2025 की रात से शुरू होकर सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 दोपहर तक मनाई जाएगी।

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि इस बार 19 अक्टूबर शाम 4:48 बजे से शुरू होकर 20 अक्टूबर दोपहर 2:12 बजे तक रहेगी।
इसी वजह से पूजा और अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त 20 अक्टूबर की सुबह 5:12 से 6:25 बजे के बीच रहेगा।

कहानी जो सिर्फ पुरानी नहीं, बल्कि ज़रूरी है

कभी-कभी पौराणिक कथाएँ हमारे समय के लिए लिखी लगती हैं।
कथा के अनुसार, नरकासुर नामक असुर ने स्वर्ग और पृथ्वी दोनों में आतंक मचा दिया था।
वह शक्ति, अभिमान और अज्ञान का प्रतीक था।

भगवान कृष्ण ने चतुर्दशी तिथि पर उसका वध किया — और लोगों को भय से मुक्त किया।
उसी रात लोगों ने पहली बार दीप जलाए थे।

इसलिए Choti diwali सिर्फ बुराई पर अच्छाई की जीत नहीं, बल्कि अहंकार पर आत्म-ज्ञान की विजय का पर्व है।
हर बार जब हम दीया जलाते हैं, हम कह रहे होते हैं —

 “अंधकार चाहे बाहर हो या भीतर, मैं अब उससे डरता नहीं।”

अभ्यंग स्नान — शरीर की नहीं, आत्मा की शुद्धि

Choti diwali की सुबह तड़के स्नान का जो रिवाज़ है, उसे “अभ्यंग स्नान” कहते हैं।
इसमें तिल या सरसों के तेल से मालिश, हल्दी या उबटन लगाकर स्नान किया जाता है।
मान्यता है कि ऐसा करने से नरकासुर की अशुद्धता दूर होती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

कहा जाता है —

“जिसने Choti diwali की सुबह अभ्यंग स्नान किया, वह नरक के दुख से मुक्त होता है।”

लेकिन अगर देखें, तो यह सिर्फ धार्मिक कर्मकांड नहीं — यह शरीर-मन को रिफ्रेश करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया भी है।

यम दीपदान — मृत्यु के अंधेरे में अमरता का दीप

Choti diwali की शाम का सबसे भावनात्मक पल होता है —
जब हर घर के बाहर मिट्टी का एक छोटा-सा दीया रखा जाता है।
इसे कहते हैं “यम दीपदान”।

कहावत है कि यह दीप यमराज के लिए जलाया जाता है —
ताकि घर में अकाल मृत्यु न आए और परिवार में दीर्घायु बनी रहे।

यह परंपरा हमें सिखाती है कि प्रकाश सिर्फ अपने लिए नहीं जलाना चाहिए।
यह दूसरों के लिए भी हो सकता है —
चाहे वह कोई गुज़रे हुए प्रियजन हों, या किसी और के जीवन में आशा की लौ।

शहरों में बदलता स्वरूप, पर वही आत्मा

आज के शहरों में Choti diwali की पहचान कुछ बदल गई है —
दीये अब बिजली के हैं, पर रोशनी का अर्थ वही है।

लोग अब पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं।
ग्रीन पटाखे, सोलर दीये, और इको-फ्रेंडली सजावट बढ़ रही है।
बच्चे अब “रंगोली प्रतियोगिता” और “ग्रीन दिवाली ड्राइव” में हिस्सा लेते हैं।

2025 में “Minimal Diwali, Maximum Happiness” सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है।
इसका अर्थ है — कम दिखावा, ज़्यादा अपनापन।

व्यापार और भावनाओं का संगम

Choti Diwali के दिन बाजारों में अलग ही हलचल होती है।
यह दिन शुभ माना जाता है — नई वस्तुएँ, बर्तन, सोना-चाँदी, और इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदने के लिए।
व्यापारी अपनी दुकानों पर दीप जलाकर “नए लेखे” की शुरुआत करते हैं।

इस बार भी ई-कॉमर्स साइट्स पर “Dhantrayodashi Mega Sale” और “Diwali Festive Week” जैसे ऑफ़र चल रहे हैं।
भक्ति और बिज़नेस — दोनों एक साथ चल रहे हैं, जैसे भारत की परंपरा और प्रगति।

आधुनिक व्याख्या — भीतर के नरकासुर से लड़ना

हम सबके भीतर कोई न कोई नरकासुर होता है —
कभी क्रोध के रूप में, कभी तुलना के रूप में, कभी असुरक्षा के रूप में।

छोटी दिवाली की असली भावना है —

“उस अंधकार को पहचानो, जो तुम्हारे भीतर है — और उसे दीप से हराओ।”

जब हम घर की सफाई करते हैं, शायद हमें अपने विचारों की सफाई भी करनी चाहिए।
जब हम तेल के दीए में लौ जलाते हैं, शायद हमें अपने भीतर करुणा की लौ भी जलानी चाहिए।

प्रदूषण और चेतावनी — रौशनी से पहले सावधानी

CPCB (सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड) के आँकड़ों के अनुसार,
अक्टूबर 2025 के मध्य में दिल्ली, नोएडा, पटना जैसे शहरों में AQI “Poor to Very Poor” श्रेणी में पहुँच सकता है (औसत 170–250)।

यानी दीपावली का आनंद तभी है, जब हवा में साँस लेने की जगह हो।
इसलिए इस बार छोटी दिवाली पर ही “ग्रीन स्टार्ट” लेने की अपील की जा रही है।

कम पटाखे, ज़्यादा दीये।
कम शोर, ज़्यादा सुकून।

मिठाइयाँ और मिलावट का सच

Diwali sweets platter with colorful traditional Indian sweets like barfi, laddu, rasgulla, and jalebi — highlighting adulteration risk during festive season. दीवाली
दीवाली के लिए सजे रंग-बिरंगे मिठाई के थाल — लेकिन इन चमकदार रंगों के पीछे मिलावट का खतरा भी छिपा है।

त्योहारों में मिठाइयाँ परंपरा हैं — लेकिन मिलावट अब भी बड़ी चिंता है।
FSSAI ने राज्यों को चेतावनी दी है कि 2025 के त्योहारों में नकली घी, मिलावटी मावा और रंगीन केमिकल वाले पेड़े बाजारों में बढ़ सकते हैं।

इसलिए अब कई लोग घर पर ही मिठाइयाँ बनाना पसंद कर रहे हैं —
जहाँ मिठास भी असली हो और भावना भी।

परिवार — त्योहार की असली रोशनी

जब बच्चे दीप जलाते हैं, माँ सामने से मुस्कुराती है, पिता आँगन की बिजली की लड़ी जोड़ते हैं, और दादी छोटी आवाज़ में आरती गाती हैं — वह क्षण ही असली “Choti diwali” है।

2025 का शहरी जीवन भले तेज़ हो,पर छोटी दिवाली हमें धीमा होना सिखाती है। रुककर देखना, महसूस करना — कि रोशनी का असली मतलब मिलकर जलना है।

निष्कर्ष — दीप सिर्फ मिट्टी का नहीं, इरादे का होता है

Choti diwali 2025 हमें यह याद दिलाती है कि असली रोशनी बाहर नहीं, भीतर होती है।
हम जितनी दीवारों पर दीये लगाएँगे, उससे ज़्यादा अगर दिल में जलाएँगे —
तो शायद अंधकार खुद ही भाग जाएगा।

 “Choti diwali का मतलब यही है —
पहले खुद को रोशन करो, फिर दुनिया को।”

By Divyay

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