air pollutionभारी बारिश में भी सड़क पर दौड़ते वाहन — दक्षिण भारत में लो-प्रेशर सिस्टम से बिगड़ा यातायात

बंगाल की खाड़ी में बना एक लो-प्रेशर ज़ोन (Low Pressure Area) इस हफ्ते दक्षिण भारत के मौसम की दिशा ही बदल चुका है। मौसम विभाग (IMD) ने पुष्टि की है कि यह दबाव क्षेत्र अब “वेल-मार्क्ड” हो गया है और अगले 24 घंटों में डिप्रेशन (Depression) में बदल सकता है। इस सिस्टम का सीधा असर Tamil Nadu, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई जिलों में देखा जा रहा है।
चेन्नई, कांचीपुरम, तिरुवल्लूर, वेल्लोर, चित्तूर और नेल्लोर — ये नाम अब सिर्फ नक्शे पर नहीं, बल्कि बारिश की रेखा पर लिखे जा चुके हैं।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बना यह सिस्टम अब “साइक्लोनिक करैक्टर” दिखा रहा है। हालांकि अभी इसका दबाव तूफ़ान बनने के स्तर तक नहीं पहुँचा है, लेकिन इसके क्लाउड बैंड्स (cloud bands) दक्षिण भारत के तटीय इलाकों को लगातार भीगा रहे हैं। पिछले 24 घंटों में चेन्नई में औसतन 90 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि वेल्लोर और तिरुवल्लूर ज़िलों में कई जगहों पर 100 मिमी से ज़्यादा वर्षा हुई है — जो अक्टूबर महीने के लिए असामान्य आँकड़ा माना जा रहा है।

IMD (भारतीय मौसम विभाग) ने साफ़ चेतावनी जारी की है —

“अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होंगे। तटीय जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों से अपील है कि अनावश्यक यात्रा से बचें और घरों में सुरक्षित रहें।”

अब सिर्फ बादल नहीं — यह जलवायु का संकेत है

इस बार की बारिश केवल मौसमी चक्र का हिस्सा नहीं, बल्कि एक जलवायु परिवर्तन (Climate Shift) की गंभीर चेतावनी भी है। मौसम और जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले पाँच वर्षों में बंगाल की खाड़ी का सतही तापमान लगभग 1.2°C तक बढ़ चुका है।
इस बदलाव ने “लो-प्रेशर सिस्टम्स” को न सिर्फ ज़्यादा बार बनने के लिए प्रेरित किया है, बल्कि उन्हें और गहरा और लम्बे समय तक टिकने वाला बना दिया है।

“पहले ऐसी प्रणालियाँ नवंबर के आसपास बनती थीं, अब अक्टूबर के मध्य में ही नज़र आने लगी हैं — यह बदलाव मामूली नहीं, बल्कि जलवायु असंतुलन का साफ़ संकेत है।”

बारिश की छुट्टी — लेकिन राहत नहीं

चेन्नई में स्कूल बंद होने के बाद भारी बारिश में जलभराव से गुजरती माँ और बच्ची. Tamil Nadu
भारी बारिश से स्कूल-कॉलेज बंद — माँ-बेटी जलभराव के बीच घर लौटती हुईं

Tamil Nadu सरकार ने पाँच जिलों में स्कूलों और कॉलेजों की छुट्टी की घोषणा की है — चेन्नई, कांचीपुरम, तिरुवल्लूर, वेल्लोर और नागपट्टिनम में आज और कल दोनों दिन स्कूल बंद रहेंगे। वहीं आंध्र प्रदेश के नेल्लोर और श्रीकाकुलम जिलों में प्रशासन ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। तेलंगाना में भी खम्मम और नलगोंडा जिलों में 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग (IMD) ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी है क्योंकि तटीय हवाएँ 50–60 किमी/घंटा की रफ्तार तक पहुँच सकती हैं।

बारिश से खेत तर, पर फसल पर खतरा

अक्टूबर का यह समय Tamil Nadu और आंध्र प्रदेश के किसानों के लिए धान कटाई का मौसम होता है। लेकिन इस बार भारी बारिश ने खेतों को तर ज़रूर किया है, पर उम्मीदों को भी डुबो दिया है। कई इलाकों में खेतों में पानी भर गया, जिससे कटाई का काम ठप पड़ गया है। कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है —

“अगर अगले दो दिनों में पानी नहीं निकला,
तो तैयार फसल में फफूंद और सड़न की संभावना बढ़ सकती है।”

कृषि विभाग ने ज़िलास्तर पर ड्रेनेज मशीनें और पंप भेजने की पुष्टि की है, ताकि खेतों से पानी निकालने का काम तुरंत शुरू हो सके और फसल को बचाया जा सके।

शहरों में जलभराव, लेकिन तैयारी पहले से बेहतर

चेन्नई और हैदराबाद दोनों ही शहरों में इस बार की बारिश ने परीक्षा तो ली, लेकिन पिछले वर्षों की तुलना में ड्रेनेज सिस्टम में सुधार साफ दिखाई दिया। कई इलाकों में सड़कों पर पानी जमा ज़रूर हुआ, पर 24 घंटे के भीतर निकासी शुरू हो जाना प्रशासनिक तैयारी का संकेत माना जा रहा है। फिर भी, चेन्नई कॉरपोरेशन ने एहतियात के तौर पर रातभर “वॉटर लॉगिंग ज़ोन” की निगरानी के लिए 270 टीमों और 56 पंपिंग स्टेशनों को सक्रिय रखा है।

बारिश का आँकड़ा (IMD Data, 22 अक्टूबर 2025)

 

राज्यप्रमुख जिलेऔसत वर्षा (मिमी)अलर्ट स्थिति
Tamil Naduचेन्नई, वेल्लोर, तिरुवल्लूर80–120 मिमीरेड अलर्ट
Andhra Pradesh नेल्लोर, चित्तूर, श्रीकाकुलम60–100 मिमीऑरेंज अलर्ट
Telangana खम्मम, नलगोंडा40–70 मिमीयलो अलर्ट

लोगों की ज़ुबानी — “बारिश डराती है, पर ज़रूरी भी है”

चेन्नई की रहने वाली शालिनी रवि (34) कहती हैं —

“हर साल बारिश आती है तो डर लगता है कि पानी घर में घुस जाएगा। पर यही बारिश हमारी झीलों और टैंकों को भरती है — इसलिए डर और राहत दोनों साथ रहते हैं।

वहीं नेल्लोर के किसान वेंकट रेड्डी ने मुस्कराते हुए कहा —

“खेत में पानी है, बस सूरज जल्दी निकले तो फसल बच जाएगी।

निष्कर्ष — यह बारिश सिर्फ आसमान से नहीं, समुद्र के दिल से आई है

भारी बारिश में साड़ी से सिर ढकती महिला, दक्षिण भारत की सड़क पर वर्षा का दृश्य
मूसलाधार बारिश में भी रोज़मर्रा की जद्दोजहद

यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति कभी दोहराती नहीं, सिखाती है। अब बारिश सिर्फ एक मौसमी घटना नहीं रही, बल्कि एक चेतावनी है — कि जलवायु बदल रही है, और हमें समय से पहले तैयारी करना सीखना होगा।

“यह बारिश सिर्फ खेतों को नहीं भिगो रही, यह हमारी सोच को भी गीला कर रही है — कि तैयारी वक्त से पहले करनी होगी, क्योंकि मौसम अब मौसम नहीं, संकेत बन चुका है।” 

By Divyay

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