दिवाली की रोशनी अभी बुझी नहीं होती कि घरों में फिर से एक अलग सी गर्माहट महसूस होती है —
वो दिन होता है भाई दूज/Bhai dooj 2025, जब भाई और बहन का रिश्ता दीपों की लौ जैसा चमकता है।
भारत में जहाँ हर रिश्ता अपनी परंपरा के साथ जुड़ा है, वहाँ भाई दूज सिर्फ एक रस्म नहीं — बल्कि एक वादा है,
कि “भाई हमेशा बहन की रक्षा करेगा और बहन हमेशा उसकी दुआ में साथ रहेगी।”
Table of Contents
ToggleBhai Dooj 2025 की सही तिथि और मुहूर्त
तारीख: गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025
द्वितीया तिथि प्रारंभ: बुधवार, 22 अक्टूबर रात 11:39 बजे
द्वितीया तिथि समाप्त: गुरुवार, 23 अक्टूबर रात 10:51 बजे
तिलक का शुभ मुहूर्त:
सुबह 10:44 बजे से दोपहर 1:09 बजे तक (अवधि — 2 घंटे 25 मिनट)
यम द्वितीया पूजा मुहूर्त:
सुबह 6:29 बजे से 8:55 बजे तक
और जानकारी – https://www.drikpanchang.com/festivals/bhai-dooj/bhai-dooj-date-time.html?year=2025#google_vignette
Bhai Dooj का पौराणिक प्रसंग — यम और यमुना का मिलन
कहानी जो हर बार सुनी जाती है, लेकिन हर बार दिल को नए सिरे से छू जाती है —
कहते हैं कि एक दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुँचे।
बहन ने प्रेम और श्रद्धा से उनका स्वागत किया, माथे पर तिलक लगाया, आरती उतारी और अपने हाथों से भोजन कराया।
यमराज अपनी बहन के स्नेह से इतने भावविभोर हो गए कि उन्होंने वरदान दिया —
“जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक कराएगा, उसे मृत्यु का भय नहीं रहेगा,
और उसके जीवन में सुख, समृद्धि और दीर्घायु बनी रहेगी।”
उसी क्षण से यह दिन “यम द्वितीया” के रूप में पूजित हुआ,
जो आज पूरे भारत में भाई दूज के नाम से प्रेम और सुरक्षा का पर्व बन गया।
यह कथा केवल एक धार्मिक कहानी नहीं, बल्कि एक संदेश है —
कि प्रेम और सम्मान, हर प्रकार के भय और असुरक्षा से बड़ी शक्ति रखते हैं।
रिवाज़ जो रिश्तों को जोड़ते हैं
Bhai Dooj हर घर में का स्वरूप थोड़ा अलग होता है,
पर भाव एक ही — “भाई बहन का साथ।”
- स्नान और पूजा: तड़के स्नान करके घर को सजाया जाता है।
- तिलक अनुष्ठान: बहनें चंदन या कुमकुम का तिलक लगाती हैं, अक्षत (चावल) चिपकाती हैं।
- आरती और मिठाई: आरती उतारकर भाई को मिठाई खिलाई जाती है — “मुँह मीठा करो भैया!”
- उपहार और आशीर्वाद: भाई बहन को उपहार या आशीर्वाद स्वरूप राशि देता है, और आशीर्वाद लेता है।
कई घरों में आज भी यम दीप जलाने की परंपरा निभाई जाती है,
जो परिवार की दीर्घायु और रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
रिश्तों की असली मिठास — भावना, न कि उपहार
भाई दूज के असली मायने गिफ्ट्स या मिठाई नहीं,
बल्कि उस प्यार और विश्वास की मिठास हैं जो भाई-बहन के रिश्ते को अनमोल बनाती है।
कई बार ये त्योहार हमें याद दिलाते हैं कि —
“रिश्तों की मजबूती शब्दों से नहीं, उपस्थिति से होती है।”
हर मुस्कान में दुआ छिपी होती है,
हर तिलक में सुरक्षा का वादा होता है।
“भाई का साया हो तो डर नहीं,
बहन की दुआ हो तो हार नहीं।”
यही है भाई दूज का असली अर्थ —
प्यार, भरोसा और साथ का वादा जो ज़िंदगीभर कायम रहता है।
Bhai Dooj और दिवाली का अद्भुत संबंध
Bhai Dooj, दिवाली के पाँचवें और अंतिम दिन मनाया जाता है।
दिवाली श्रृंखला की कहानी यही कहती है कि प्रकाश का उत्सव अंत में रिश्तों की रोशनी पर पूरा होता है।
धनतेरस: धन और स्वास्थ्य
नरक चतुर्दशी: नकारात्मकता से मुक्ति
मुख्य दिवाली: लक्ष्मी और समृद्धि
गोवर्धन पूजा: प्रकृति और आस्था
Bhai Dooj: संबंध और स्नेह
यानी दिवाली का अंत “रोशनी” से नहीं, बल्कि “रिश्तों की मिठास” से होता है।
भारत के अलग-अलग कोनों में Bhai Dooj के रूप
भाई दूज का स्वरूप भले ही हर राज्य में थोड़ा अलग हो,
लेकिन इसके केंद्र में प्यार, सुरक्षा और अपनापन की भावना हमेशा एक-सी रहती है।
| राज्य / क्षेत्र | नाम / स्थानीय परंपरा | मुख्य रीति-रिवाज |
|---|---|---|
| उत्तर भारत | Bhai Dooj / भैया दूज | बहनें भाइयों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाती हैं और दीर्घायु की कामना करती हैं। |
| महाराष्ट्र, गुजरात | भाऊबीज (Bhau Beej) | बहनें आरती करती हैं, भाइयों को उपहार देती हैं और मंगलकामना करती हैं। |
| पश्चिम बंगाल | भाई फोटा (Bhai Phonta) | तिलक के साथ सुरक्षा का वचन और पारंपरिक भोजन का आयोजन होता है। |
| दक्षिण भारत | यम द्वितीया (Yama Dwitiya) | इस दिन यमराज और यमुना की पूजा होती है, और दीपदान का विशेष महत्व है। |
हर क्षेत्र का रूप अलग, पर भाव एक ही —
“जहाँ प्यार है, वहीं त्योहार है।”
त्योहार का स्वाद — भाई के लिए बहन का प्यार भरा खाना
इस दिन बहनें अपने भाइयों के लिए खास थाली तैयार करती हैं:
पूरी, चना दाल, हलवा, मिठाई, पापड़, रायता, और कभी-कभी भाई की पसंद का “राजा प्लेटर।”
कई जगहों पर बहनें खुद हाथों से लड्डू या बेसन की बर्फी बनाती हैं —
क्योंकि माँ कहती हैं — “प्यार का स्वाद किसी बाजार में नहीं मिलता।”
डिजिटल युग का भाई दूज — पर भावनाएँ वही हैं
2025 में जब कई भाई-बहन अलग-अलग शहरों या देशों में हैं,
तो Bhai dooj अब ऑनलाइन गले लगने का दिन बन गया है।
बहनें वीडियो कॉल पर तिलक लगाती हैं,
ई-गिफ्ट्स या कस्टम वीडियो संदेश भेजती हैं,
भाई QR कोड से उपहार राशि भेजते हैं —
लेकिन जो चीज़ नहीं बदली, वो है रिश्ते की गर्माहट।
इको-फ्रेंडली और संवेदनशील Bhai dooj
2025 का Bhai dooj अब सिर्फ धार्मिक नहीं, सामाजिक रूप से ज़िम्मेदार पर्व भी बन चुका है।
केमिकल-फ्री तिलक (कुमकुम)
बिना प्लास्टिक के गिफ्ट रैपिंग
घी के दीए और प्राकृतिक धूपबत्ती
मिलावटी मिठाइयों से परहेज़
( पढ़ें — दिवाली 2025 पर मिलावटी मिठाइयों से सावधान रहें)
यानी अब यह त्योहार सिर्फ प्यार बाँटने का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने का भी बन गया है।
Bhai dooj का आधुनिक संदेश — सिर्फ रिश्ते नहीं, रिश्तेदारी का वचन
Bhai dooj हमें यह सिखाता है कि “रिश्ता केवल जन्म से नहीं, कर्म से भी निभाया जाता है।”
इस दिन बहनें सिर्फ रक्षा की कामना नहीं करतीं,
बल्कि अपने भाई के सुख, मानसिक शांति और सफलता की दुआ भी देती हैं।
संगठन और स्कूल अब इस दिन “Respect & Safety Pledge” जैसे कार्यक्रम कर रहे हैं,
जहाँ बच्चे भाई दूज को “Equality & Care Day” के रूप में मनाते हैं।
यह बदलाव शायद यही दिखाता है कि संस्कृति का अर्थ समय के साथ और भी गहरा हो जाता है।
निष्कर्ष — रोशनी तो हर साल आती है, पर रिश्तों की रोशनी दुर्लभ होती है
Bhai dooj 2025 हमें याद दिलाता है कि सुरक्षा केवल जिम्मेदारी नहीं, स्नेह की भाषा भी है।
यह त्योहार बताता है कि अगर भाई दूज के दिन कोई दीया जलाना है,
तो वो है — विश्वास का दीया, सम्मान का दीया, और रिश्ते की अनमोल लौ।
“दीयों की तरह जगमगाते रहें रिश्ते,
जहाँ बहन की दुआ और भाई का साथ हो —
वहीं सच्ची दिवाली होती है।”
