अरावली पहाड़ियाँ (Aravalli Hills), जो दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के जलवायु संतुलन, भूजल रिचार्ज और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, एक बार फिर से बहस के केंद्र में हैं। हालिया समय में उसके खनन नियमों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार की गई नई ‘definition’ को लेकर विरोध, विवाद और आलोचना तेज़ हो गई है।
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Toggleनई ‘Definition’ और विवाद की शुरुआत
सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को एक uniform definition को मंज़ूरी दी, जिसके तहत Aravalli Hills को इस तरह परिभाषित किया गया कि उसमें सिर्फ़ वही landforms शामिल हैं, जिनकी ऊँचाई local surrounding terrain से 100 मीटर या उससे अधिक है।
सरकार का कहना है कि इस definition से 90% से ज़्यादा क्षेत्र सुरक्षित रहेगा, लेकिन आलोचक कहते हैं कि इससे छोटी पहाड़ियाँ और hillocks जो पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं, उनकी सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है।
यही नई definition और mining से जुड़े नियम विवाद का मुख्य कारण बना है।
Environment Minister की सफ़ाई: Mining पर कोई ढील नहीं
केंद्रीय Environment Minister Bhupender Yadav ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में स्पष्ट किया है कि इससे खनन नियंत्रण में कोई ढील नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि:
- अभी केवल 0.19% क्षेत्र को mining के लिए eligible बताया गया है, बाकी सब सुरक्षित रहेगी।
- कोर, protected और ecologically sensitive areas सहित NCR के हिस्सों में कोई नया mining lease नहीं दिया जाएगा।
- नई mining की अनुमति Management Plan for Sustainable Mining (MPSM) तैयार होने के बाद ही मिलेगी।
- नई mining leases पर स्वीकृति मांगनीय scientific study के बाद ही दी जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ misinformation और भ्रम फैलाया जा रहा है, लेकिन सरकार 90% से अधिक Aravalli को संरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
कोर्ट और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पहले के हस्तक्षेप
यह पहली बार नहीं है जब अदालत ने Aravalli की रक्षा के लिए हस्तक्षेप किया है। पिछले मामलों में:
- सुप्रीम कोर्ट ने Delhi’s ridge (जो Aravalli का हिस्सा है) में बिना अनुमति construction रोकने के निर्देश दिए।
- National Green Tribunal (NGT) ने illegal mining के भूमि rehabilitation का आदेश दिया।
- 2019 में Haryana सरकार की वह विधायी कोशिश भी कोर्ट ने रोकी थी, जिसमें Aravalli की बहुत सी जमीन को non-forest activity के लिए खोल दिया गया था।
इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि अदालतें अक्सर ecologically sensitive क्षेत्रों के संरक्षण के लिए कदम उठाती रही हैं।
आलोचकों की चिंताएँ
पर्यावरण विशेषज्ञ और विरोधी समूहों का कहना है कि नई definition और mining नियम पेचीदा ecological समझ को कमी पर आधारित बनाते हैं। उनकी मुख्य बातें हैं:
- Aravalli की छोटी पहाड़ियाँ भी जल संसाधन, जैव विविधता और मिट्टी की कटाव नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- सिर्फ़ ऊँचाई के आधार पर उन्हें ‘Aravalli’ से बाहर कर देना, उन्हें mining और construction के लिए खुला छोड़ सकता है।
- इससे धूल, हवाएँ, desertification और Delhi-NCR क्षेत्र में वायु गुणवत्ता को नुकसान हो सकता है।
वे चेतावनी देते हैं कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल बड़े hills के संरक्षण से नहीं होती, बल्कि पूरे landscape को समझकर निर्णय लेने की ज़रूरत है।
सरकार की दक्षता और संरक्षण का दावा
केंद्र सरकार की स्थिति स्पष्ट है कि:
- नया definition mining नियंत्रण को कमज़ोर नहीं करता,
- 90% से अधिक Aravalli संरक्षित रहेगा,
- कोई नया mining lease तभी मिलेगा जब scientific plan तैयार हो,
- existing mining को भी strict safeguard के तहत रखा जाएगा।
Minister Bhupender Yadav ने misinformation फैलाने वाले कुछ U-tube चैनलों और समूहों की भी कड़ी आलोचना की है और जनता से सत्यापित स्रोतों से ही जानकारी लेने की अपील की है।
निष्कर्ष: संरक्षण बनाम विकास
Aravalli Hills को लेकर यह विवाद सिर्फ़ खनन का ही मामला नहीं है, बल्कि यह environmental protection, ecological balance और sustainable development के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
जहाँ सरकार यह दावा करती है कि सुरक्षा सर्वोपरि है और mining नियंत्रण में रहेगा, वहीं विरोधियों का कहना है कि पैरामीटर और definitions कुछ हिस्सों की सुरक्षा को कमज़ोर कर सकते हैं।
आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, management plan की scientific study और उसके बाद आने वाले फैसले यह तय करेंगे कि Aravalli का भविष्य, विकास और पर्यावरण सुरक्षा कैसे संतुलित रहता है।
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