गुजरात के Ahmedabad शहर में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब शहर के कई प्रतिष्ठित स्कूलों — Zydus School (Vejalpur), Zebar School और Aggarwal International School — को bomb threat email मिले। इन धमकी भरे ई-मेल्स में स्कूल परिसरों को विस्फोट से उड़ाने की बात कही गई, जिसके बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियाँ तुरंत हरकत में आ गईं।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, कम से कम इन तीन स्कूलों को एक जैसे या मिलते-जुलते ई-मेल प्राप्त हुए, जिनमें स्कूलों को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी। जैसे ही स्कूल प्रशासन को इन ई-मेल्स की जानकारी मिली, उन्होंने बिना देर किए पुलिस को सूचित किया।
Table of Contents
ToggleSecurity Protocol के तहत स्कूल खाली कराए गए
धमकी की गंभीरता को देखते हुए, संबंधित स्कूलों में students और staff को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाला गया।
कई स्कूलों में:
- कक्षाएँ तुरंत रोक दी गईं
- बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया
- parents को सूचित किया गया
- स्कूल परिसरों को खाली कराया गया
प्रशासन का पहला लक्ष्य किसी भी तरह की जान-माल की हानि को रोकना था।
You can hear the panic in their voices. Teachers trying to stay calm, organizing an early break for children after a bomb threat was reported.
— Kumar Manish (@kumarmanish9) December 17, 2025
This is a nearby school in Ahmedabad.
Many of the Schools in Ahmedabad has recieved bomb threats. @nirnaykapoor @dave_janak pic.twitter.com/9rkwvE0cVr
#WATCH | Ahmedabad | Vastrapur PI LL Chavda says, "A few schools have received a bomb threat via email today. Based on the information, the students have been given a holiday... Investigation is going on by Bomb Detection and Disposal Squad and Dog Squad..." https://t.co/RKLmnIXjjX pic.twitter.com/qn0D490x6m
— ANI (@ANI) December 17, 2025
Police और Bomb Squad की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही:
- स्थानीय police teams मौके पर पहुँचीं
- Bomb Disposal Squad को तैनात किया गया
- डॉग स्क्वॉड की मदद से पूरे स्कूल परिसर की तलाशी ली गई
- आसपास के इलाकों को भी सुरक्षित किया गया
प्रारंभिक तलाशी में किसी भी स्कूल से कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने इसे हल्के में लेने से इनकार किया।
Email की जांच और Cyber Angle
जांच एजेंसियाँ अब इस मामले को cyber crime angle से भी देख रही हैं।
ध्यान इस बात पर है कि:
- ई-मेल किस सर्वर या अकाउंट से भेजे गए
- क्या सभी स्कूलों को एक ही source से मेल मिला
- मेल भेजने का उद्देश्य डर फैलाना था या कोई गहरी साज़िश
Police का कहना है कि ई-मेल के technical details की बारीकी से जांच की जा रही है और ज़रूरत पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों की मदद भी ली जा सकती है।
Parents में चिंता, प्रशासन का आश्वासन
इस घटना के बाद कई parents अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखे।
हालाँकि, प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने साफ़ कहा कि:
- सभी स्कूल परिसरों को पूरी तरह safe declare किए बिना कक्षाएँ दोबारा शुरू नहीं होंगी
- हर threat को गंभीरता से लिया जा रहा है
- बच्चों की सुरक्षा में कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी
प्रशासन ने parents से अफ़वाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा रखने की अपील की।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
अहमदाबाद ही नहीं, देश के अन्य शहरों में भी पिछले कुछ वर्षों में इस तरह के fake bomb threat emails सामने आते रहे हैं।
अक्सर जांच में ये धमकियाँ hoax निकलती हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियाँ हर बार इन्हें वास्तविक खतरे की तरह ही ट्रीट करती हैं।
Experts का मानना है कि ऐसे ई-मेल्स का मक़सद:
- डर और भ्रम फैलाना
- सुरक्षा तंत्र की परीक्षा लेना
- या attention हासिल करना
हो सकता है, लेकिन जब बात स्कूलों और बच्चों की सुरक्षा की हो, तो कोई भी जोखिम नहीं लिया जा सकता।
कानूनी कार्रवाई और सख़्त संदेश
Police ने स्पष्ट किया है कि अगर यह धमकी झूठी भी साबित होती है, तब भी:
- Email भेजने वाले के खिलाफ़ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी
- ऐसे मामलों को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाता है
- दोषी पाए जाने पर सख़्त सज़ा का प्रावधान है
यह संदेश साफ़ है कि public safety से जुड़ी किसी भी तरह की शरारत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निष्कर्ष: सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
Ahmedabad में स्कूलों को मिले bomb threat emails ने यह याद दिलाया कि सुरक्षा से जुड़ी किसी भी सूचना को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
भले ही अब तक कुछ भी संदिग्ध न मिला हो, लेकिन प्रशासन की त्वरित और जिम्मेदार प्रतिक्रिया ने यह साबित किया कि preparedness और coordination ही ऐसे हालात से निपटने का सबसे मज़बूत तरीका है।
- इस समय सबसे अहम बात यही है कि
- जांच पूरी होने दी जाए,
- अफ़वाहों से बचा जाए,
- और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
