आयुर्वेद में गिलोय (Tinospora cordifolia) को ‘अमृता’ कहा गया है, जिसका अर्थ है – अमरत्व देने वाली बेल। यह एक सदाबहार लता है, जिसके तने में औषधीय गुण सबसे अधिक पाए जाते हैं। आयुर्वेद में गिलोय को “त्रिदोष नाशक” यानी वात, पित्त और कफ – तीनों दोषों को संतुलित करने वाला माना जाता है।
गिलोय एक बेलनुमा औषधीय पौधा है, जो नीम या आम के पेड़ पर अक्सर लिपटा मिलता है। इसकी पत्तियाँ दिल के आकार की होती हैं और इसमें मौजूद औषधीय गुण शरीर को कई बीमारियों से बचाते हैं।
गिलोय का महत्व सदियों से भारतीय चिकित्सा प्रणाली में रहा है। माना जाता है कि यह न केवल रोगों से बचाती है बल्कि शरीर को भीतर से मज़बूत भी बनाती है। आजकल जब लोग इम्यूनिटी को लेकर सबसे ज़्यादा चिंतित रहते हैं, गिलोय की लोकप्रियता और भी बढ़ गई है।
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Toggle1.रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए
गिलोय का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालते हैं और शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं।
2. बुखार और वायरल संक्रमण में लाभकारी
गिलोय को ‘फीवर हर्ब’ भी कहा जाता है क्योंकि यह डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार जैसी स्थितियों में राहत देता है। यह प्लेटलेट्स की संख्या को संतुलित रखने में मदद करता है और शरीर की थकान कम करता है।
3. डायबिटीज़ में सहायक
गिलोय को प्राकृतिक ब्लड शुगर कंट्रोलर माना जाता है। नियमित रूप से गिलोय रस का सेवन ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करता है और डायबिटीज़ रोगियों के लिए लाभकारी है।
4. पाचन तंत्र को मजबूत करे
गिलोय का सेवन पाचन को बेहतर बनाता है। यह कब्ज, गैस, एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत देता है और भूख को संतुलित रखता है।
5. तनाव और थकान दूर करे
गिलोय शरीर और दिमाग दोनों को शांत करने का काम करता है। यह तनाव, चिंता और थकान को कम करके शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है।
6. त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद
गिलोय का सेवन खून को शुद्ध करता है, जिससे त्वचा पर मुहांसे, दाग-धब्बे और एलर्जी कम होते हैं। यह बालों को झड़ने से रोकने और उन्हें मज़बूत बनाने में भी सहायक है।
7. जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत
गिलोय में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गठिया और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करते हैं। इसका रस या काढ़ा आर्थराइटिस और सूजन में आराम देता है।
8. सांस संबंधी रोगों में उपयोगी
गिलोय का काढ़ा अस्थमा, खांसी और जुकाम जैसी समस्याओं में राहत देता है। यह फेफड़ों को मजबूत बनाता है और सांस लेने की दिक्कत कम करता है।
9. हृदय स्वास्थ्य
गिलोय का नियमित सेवन रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। इससे हृदय स्वस्थ रहता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
10. लीवर और किडनी की सुरक्षा
गिलोय को एक प्राकृतिक डिटॉक्सिफ़ायर माना जाता है। यह लीवर और किडनी को विषाक्त पदार्थों से बचाती है और उनकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाती है।
सावधानियाँ
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ बिना डॉक्टर की सलाह गिलोय का सेवन न करें।
- अधिक मात्रा में सेवन से ब्लड शुगर बहुत कम हो सकता है।
- लंबे समय तक लगातार अधिक मात्रा में लेने से कब्ज की समस्या हो सकती है।
- हमेशा सीमित और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही सेवन करें।
गिलोय का सेवन कैसे करें ?
- गिलोय का रस – सुबह खाली पेट 15–20 ml गिलोय का जूस पीना लाभकारी है।
- काढ़ा – गिलोय की डंडी को तुलसी और अदरक के साथ उबालकर काढ़ा बनाया जा सकता है।
- गिलोय की गोलियाँ/कैप्सूल – बाज़ार में उपलब्ध गिलोय टैबलेट्स का भी प्रयोग किया जा सकता है।
- ताज़ा डंठल चबाना – नीम पर चढ़ी हुई गिलोय की डंडी को चबाना सबसे असरदार माना जाता है।
- पाउडर – 1–2 चम्मच गुनगुने पानी/दूध के साथ लिया जाता है
- अर्क – आयुर्वेदिक दवा की तरह, छोटे डोज़ में लिया जाता है ।
हर्बल चाय – गिलोय को दालचीनी/पुदीना के साथ उबालकर पीना चाहिए ये ।
घरेलू नुस्खे (Home Remedies)
- सर्दी-जुकाम: गिलोय + तुलसी + काली मिर्च का काढ़ा।
- त्वचा रोग: गिलोय रस + एलोवेरा का मिश्रण।
- ब्लड प्यूरिफ़िकेशन: गिलोय + नीम का जूस।
- जोड़ों के दर्द में: गिलोय पाउडर को हल्दी वाले दूध के साथ लेना।
गिलोय बनाम अन्य औषधियाँ
- गिलोय vs अश्वगंधा – अश्वगंधा शरीर की ताक़त और तनाव कम करने में लाभकारी है, जबकि गिलोय रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अग्रणी है।
- गिलोय vs नीम – नीम रक्त शोधन और त्वचा रोगों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि गिलोय इम्यूनिटी और बुखार में असरदार है।
- गिलोय vs हल्दी– एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक, चोट और संक्रमण में तुरंत असरदार है , जबकी गिलोय आंतरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और क्रॉनिक बीमारियों से बचाने में मददगार।
( गिलोय पाउडर + हल्दी वाला दूध गठिया और जोड़ों के दर्द में कारगर है।) - गिलोय vs आंवला– विटामिन C से भरपूर, यह एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट है और त्वचा व बालों के लिए वरदान है, जबकी गिलोय इम्यूनिटी को मजबूत करने और बुखार, संक्रमण से लड़ने में ज़्यादा प्रभावी है।
(दोनों मिलकर [गिलोय रस + आंवला जूस] इम्यूनिटी और पाचन को और बेहतर करते हैं।) - गिलोय vs तुलसी– श्वसन रोगों (सर्दी-जुकाम, खांसी, दमा) के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है,जबकी गिलोय लंबे समय से बुखार और शरीर की कमजोरी को दूर करने में मददगार होता है।
( गिलोय + तुलसी का काढ़ा एक शक्तिशाली घरेलू नुस्खा है।) - गिलोय vs अदरक – पाचन और सर्दी-जुकाम के लिए सर्वश्रेष्ठ है, जबकी गिलोय पूरे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और क्रॉनिक फीवर को नियंत्रित करता है।
(दोनों का संयोजन शरीर की गर्मी और इम्यूनिटी दोनों बढ़ाता है।) - गिलोय vs एलोवेरा – त्वचा और पाचन के लिए प्रसिद्ध है, यह ठंडक पहुँचाता है और डिटॉक्स में मदद करता है, गिलोय रोगों से लड़ने की शक्ति देता है और शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है।
(गिलोय रस + एलोवेरा जूस का मिश्रण त्वचा और इम्यूनिटी दोनों के लिए लाभकारी है।)
सामान्य प्रश्न (FAQ)
प्रश्न1: क्या गिलोय कोविड-19 में कारगर है?
वैज्ञानिक रूप से गिलोय इम्यूनिटी को बढ़ाता है, लेकिन इसे कोविड का इलाज नहीं माना जा सकता।
प्रश्न 2: क्या गिलोय रोज़ ले सकते हैं?
हाँ, लेकिन सीमित मात्रा (10–20 ml जूस या 1–2 टैबलेट) ही लें।
प्रश्न 3: नीम गिलोय सबसे अच्छी क्यों मानी जाती है?
नीम पर चढ़ी गिलोय में औषधीय गुण और भी अधिक पाए जाते हैं।
प्रश्न4: क्या गिलोय से वज़न घटाया जा सकता है?
गिलोय शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालती है और पाचन सुधारती है, जिससे वज़न नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
प्रश्न 5: क्या गिलोय बच्चों को दी जा सकती है?
हाँ, लेकिन बहुत कम मात्रा और केवल आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में।
प्रश्न 6: गिलोय लेने का सबसे अच्छा समय कब है?
सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले, हल्का-गुनगुना रूप में लेना सबसे अच्छा माना जाता है।
गिलोय सचमुच एक अमृतबूटी है। यह शरीर को स्वस्थ रखने, बीमारियों से बचाने और मानसिक शांति देने का कार्य करती है। लेकिन याद रखें, कोई भी औषधि तभी लाभकारी होती है जब उसका सही मात्रा में और सही मार्गदर्शन में सेवन किया जाए। गिलोय आपके जीवन का हिस्सा बने, मगर संतुलित रूप में।